महाराष्ट्र के राज्यपाल आर. एन. राधाकृष्णन ने कहा कि यह “निराशाजनक” है कि कुछ लोगों को आज भी जाति या धर्म के आधार पर आवास नहीं दिया जाता और ऐसी भेदभावपूर्ण प्रवृत्तियों को समाप्त किया जाना चाहिए। ‘लोकमत वर्ल्ड पीस एंड हार्मनी थ्रू इंटरफेथ डायलॉग’ कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि अंतर-धार्मिक संवाद की अवधारणा नयी नहीं है और यह विभाजन को पाट सकती है तथा पूर्वाग्रहों को खत्म कर सकती है। कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और लोकमत मीडिया समूह के चेयरमैन एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने कहा, ‘‘बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक समाज में यह आवश्यक है कि हम अपने नागरिकों को सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाएं। इसकी शुरुआत स्कूल और कॉलेजों से होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को सभी धर्मों के त्योहार मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपने छात्रों को सभी धर्मों के पर्व मनाने से रोक रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को विभिन्न धर्मों के उपासना स्थलों पर ले जाना चाहिए ताकि उनमें अन्य धर्मों के प्रति सम्मान और संवेदना उत्पन्न हो। 

उन्होंने कहा, ‘‘यह सुनकर दुख होता है कि जाति या धर्म के आधार पर लोगों को मकान देने से इनकार किया जाता है। यह प्रवृत्ति अब हमेशा के लिए समाप्त होनी चाहिए। केवल अंतर धार्मिक संवाद से ही विश्व शांति और सद्भाव की स्थापना की जा सकती है। हमें हर नागरिक को शांति और सद्भाव का भागीदार बनाना होगा।” आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारतीय संस्कृति को भाषा, त्वचा के रंग या आस्था से परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘हर कर्म का परिणाम होता है। हमने कभी नहीं कहा कि विविधता हमें कमजोर बनाती है। हमने हमेशा कहा है कि विविधता और बहुलता प्रकृति का नियम है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।” विजय दर्डा ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि भाईचारा, जनकल्याण, विश्व शांति, करुणा और क्षमा पर ध्यान केंद्रित किया जाए। 

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