उत्तर प्रदेश में रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों से होने वाले सहरी और इफ्तार के ऐलान पर सियासत गरमा गई है। विधानसभा में बीते गुरुवार को सरकार ने साफ कर दिया कि लाउडस्पीकर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश लागू रहेंगे और किसी को भी अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी।

सपा विधायक ने उठाई मांग
मिली जानकारी के मुताबिक, शून्य काल के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक कमाल अख्तर ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान सहरी और इफ्तार के समय के बारे में बताने के लिए मस्जिदों से कुछ मिनटों का ऐलान किया जाता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि चूंकि लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं, इसलिए रमजान के महीने को देखते हुए विशेष अनुमति दी जाए ताकि रोजेदारों को राहत मिल सके।

सरकार का तर्क: ‘अब घड़ी और मोबाइल का जमाना है’
सपा की मांग पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि रात 10 बजे के बाद इनका इस्तेमाल नहीं होगा। मंत्री ने परंपरा पर तंज कसते हुए कहा कि मस्जिदों से ऐलान की परंपरा उस दौर की है जब घड़ियां नहीं होती थीं और लोग धूप देखकर समय का अंदाजा लगाते थे। आज रिक्शा चलाने वाले से लेकर सब्जी बेचने वाले तक, हर कमजोर व्यक्ति के पास मोबाइल फोन है। अब समय देखने के लिए लाउडस्पीकर की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
सरकार ने स्पष्ट किया कि वे किसी की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल कानून और अदालती आदेश का पालन करा रहे हैं। जब कमाल अख्तर ने तर्क दिया कि कोर्ट ने आवाज की तीव्रता (Volume) कम रखने को कहा है, पूरी तरह बैन नहीं किया, तब भी मंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने रुख पर कायम रहे।

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