यूएस–इजरायल–ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस और एलपीजी की बाधारहित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) को लागू किया है।
बता दें कि दुनिया इस समय ईरान और इजरायल (अमेरिका समर्थित) के बीच छिड़े संघर्ष की तपिश महसूस कर रही है। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर LPG और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत में भी गैस की किल्लत न हो और आपकी रसोई से लेकर सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों तक का पहिया न थमे, इसके लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। सरकार ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत ESMA लागू कर दिया है। इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य यह है कि सीमित संसाधनों के बावजूद देश के सबसे जरूरी हिस्सों में गैस की कमी न होने पाए।
ESMA क्या है?
ESMA (Essential Services Maintenance Act), जिसे “आवश्यक सेवा अधिनियम” भी कहा जाता है, 1968 में लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और बिजली जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की आपूर्ति कभी रुक न जाए। कानून में कई प्रकार की आवश्यक सेवाओं की सूची है, और राज्य सरकारें अपने अनुसार इन्हें चुन सकती हैं।
किसे कितनी मिलेगी गैस? सरकार का नया मास्टर प्लान
सरकार ने देश की जरूरतों को देखते हुए गैस वितरण को 4 मुख्य प्राथमिकताओं में बांटा है। सबसे पहली प्राथमिकता आम जनता और देश के बुनियादी ढांचे को दी गई है। इस आपातकालीन प्रावधान (ESMA) के तहत अब देश में उपलब्ध प्राकृतिक गैस का बंटवारा “किसे पहले मिलेगा” के आधार पर तय किया गया है।
किसे मिलेगी कितनी गैस? (प्रायोरिटी लिस्ट)
सरकार ने देश की जरूरतों को चार मुख्य हिस्सों में बांटा है, ताकि सबसे जरूरी सेवाओं को बिना रुके गैस मिलती रहे:
1. प्राथमिकता सेक्टर – 1 (सबसे जरूरी)
इन क्षेत्रों को उनकी पिछली 6 महीने की औसत खपत का 100% हिस्सा मिलता रहेगा:
- घरों में आने वाली पीएनजी (PNG)।
- गाड़ियों के लिए सीएनजी (CNG)।
- एलपीजी (LPG) का उत्पादन और जरूरी प्लांट।
- गैस पाइपलाइन को चालू रखने के लिए जरूरी ईंधन।
2. प्राथमिकता सेक्टर – 2 (खेती और खाद)
- उर्वरक (Fertilizer) प्लांट्स: इन्हें पिछले 6 महीने की खपत का 70% हिस्सा मिलेगा।
- शर्त: इस गैस का इस्तेमाल सिर्फ खाद बनाने में होगा। प्लांट अपनी गैस किसी दूसरी यूनिट को ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे और इसका प्रमाण मंत्रालय (PPAC) को देना होगा।
3. प्राथमिकता सेक्टर – 3 (उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग)
- चाय उद्योग और अन्य बड़े कारखाने: जो राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े हैं, उन्हें उनकी औसत खपत का 80% गैस दी जाएगी।
- इसके नियम PPAC और इंडस्ट्री कमेटी मिलकर तय करेंगे।
4. प्राथमिकता सेक्टर – 4 (शहरों के कमर्शियल उपभोक्ता)
- CGD नेटवर्क के जरिए औद्योगिक व व्यावसायिक उपयोग: शहरों में फैक्ट्रियों और कमर्शियल सेंटर्स को उनकी औसत खपत का 80% हिस्सा मिलता रहेगा।
सप्लाई पूरी करने के लिए कहां होगी कटौती? (गैस का पुनर्वितरण)
ऊपर दिए गए जरूरी सेक्टरों (जैसे घर और सीएनजी) की सप्लाई को 100% बनाए रखने के लिए सरकार कुछ अन्य जगहों से गैस की कटौती करेगी:
- पेट्रोकेमिकल और पावर प्लांट्स: जरूरत पड़ने पर यहाँ सप्लाई आंशिक या पूरी तरह कम की जा सकती है।
- तेल शोधन (Refineries): रिफाइनरी कंपनियों को उनकी औसत खपत का लगभग 65% हिस्सा ही दिया जाएगा।
