महाराष्ट्र में कम से कम चार नगर निकायों और हैदराबाद में एक नगर निकाय ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया है।  कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के आदेश से राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दल एनसीपी (सपा) और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने इसे लोगों के भोजन विकल्पों पर हमला बताया है।

इस पर शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, हमारे घर में, यहां तक कि नवरात्रि पर भी हमारे प्रसाद में झींगे और मछली होती है, क्योंकि यह हमारी परंपरा है, यह हमारा हिंदुत्व है। यह धर्म का मामला नहीं है और न ही यह राष्ट्रीय हित का मामला है। ठाकरे ने कहा कि कल्याण-डोंबिवली के आयुक्त को निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाएं, यह हमारा अधिकार और स्वतंत्रता है। वे हमें यह नहीं बता सकते कि शाकाहारी खाएं या मांसाहारी। हम निश्चित रूप से मांसाहारी खाएंगे। यह हमारे घर की परंपरा है। 

एनसीपी (शरद पवार) नेता जितेंद्र आव्हाड ने कथित तौर पर कहा कि वे प्रतिबंध के विरोध में 15 अगस्त को मांसाहारी भोजन खाएंगे। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अगर यह आषाढ़ी एकादशी या महावीर जयंती पर होता तो प्रतिबंध समझ में आता। लेकिन जब ऐसा कोई अवसर ही नहीं है, तो मांस की दुकानों को बंद रखने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? केडीएमसी की डिप्टी कमिश्नर (लाइसेंस) कंचन गायकवाड़ ने भी कहा कि यह आदेश 1988 से हर साल जारी किया जाता रहा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, केडीएमसी के आदेश के अनुसार, बकरियों, भेड़ों, मुर्गियों और बड़े जानवरों के लाइसेंस प्राप्त कसाईयों की सभी बूचड़खाने और दुकानें 14 अगस्त की मध्यरात्रि से 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक 24 घंटे के लिए बंद रहेंगी, और कहा गया है कि अगर कोई इसका उल्लंघन करता है, तो महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम, 1949 लागू होगा।

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