उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार गोवंश की रक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात करते हैं, लेकिन मेरठ नगर निगम की लापरवाही ने इन दावों को खोखला साबित कर दिया है। ताजा मामला सूरजकुंड स्थित नगर निगम वाहन डिपो का है, जहां गौवंश ट्रॉमा सेंटर बनाया गया है।
यहां आधा दर्जन से अधिक गायें भूख-प्यास से तड़प-तड़पकर दम तोड़ चुकी हैं, जबकि कई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां रहने वाले गोवंश को न तो समय पर चारा मिल रहा है और न ही पानी। इस लापरवाही का परिणाम है कि मृत गायों के शव जमीन पर और गाड़ियों में खुले पड़े मिले। शव सड़ने के कारण आसपास बदबू फैल गई, जिससे स्थिति और भी दयनीय हो गई।
नगर निगम पर उठे सवाल
यह घटना उस समय और भी चौंकाने वाली है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले कान्हा गौशाला में भी भूख-प्यास से कई गोवंश की मौत का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में पशु स्वास्थ्य अधिकारी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया था। लेकिन अब सूरजकुंड डिपो में हुई इन मौतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इस बार जिम्मेदार कौन है और कार्रवाई किसके खिलाफ होगी। लोगों का कहना है कि जब नगर निगम ही गोवंश की देखभाल करने में नाकाम है, तो फिर बाकी गौशालाओं की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि नगर निगम मेरठ के मेयर भारतीय जनता पार्टी से हैं और वही पार्टी गोवंश संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बताती रही हैं। बावजूद इसके, उनकी मौजूदगी में लगातार गोवंश भूख-प्यास से मर रहे हैं।
धरने पर बैठे भाजपा पार्षद और लोग
घटना के विरोध में भाजपा पार्षद पवन चौधरी समेत कई स्थानीय लोग सूरजकुंड डिपो पर ही धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि नगर निगम के अफसरों की लापरवाही से निर्दोष गौवंश की जान जा रही है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने नगर आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का आरोप है कि लाखों रुपए का बजट गौशालाओं और ट्रॉमा सेंटर पर खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पशुओं के लिए न तो पर्याप्त चारा खरीदा जाता है और न ही पानी की सही व्यवस्था की जाती है।
जनता में आक्रोश
इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब सरकार और प्रशासन गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तो यह गंभीर लापरवाही है। स्थानीय लोग सवाल यह भी उठा रहे है कि आखिर बार-बार एक जैसी घटनाएं क्यों हो रही हैं और जिम्मेदार अफसरों पर सरकार क्यों कार्रवाई नहीं करती।
