मेरठ में शनिवार को शिवरात्रि की रात राली चौहान गांव में कांवड़ में 11हजार KV की लाइट से टच होने के कारण उतरे करंट से 6 लोगों की मौत हो गई। 16 लोग घायल हो गए। पूरे हादसे में पीवीवएनएल की एमडी चैत्रा वी ने बिजली विभाग को क्लीन चिट दे दी है।

चैत्रा वी ने ग्रामीणों की शटडाउन मांगने की बात को गलत बताते हुए कहा कि कोई शटडाउन नहीं मांगा गया था। प्रारंभिक जांच में ये साबित हो गया कि कांवड? की हाइट ज्यादा होने से हादसा हुआ। बिजली विभाग की गलती नहीं है।

रविवार को एमडी ने प्रेसकांफ्रेंस बुलाकर पूरे बिजली विभाग को हादसे में पाकसाफ बताते हुए सारी गलती कांवड़ियों, कांवड़ की हाइट की बता दी।

पीवीवीएनएल की एमडी चैत्रा वी ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि जहां कहीं भी बिजली के पोल, तार, लाइन, खंभे, ट्रांसफारमर हैं तो जनता ध्यान रखे उसमें बिजली चलती रहती है। आम नागरिक को इससे सावधानी बरतना चाहिए। इससे जनता डिस्टेंस मेंटेन करे ताकि विभाग की संपत्ति सुरक्षित रहे और आम आदमी सुरक्षित रहे।

कहा कि शिवरात्रि पर्व पर दुर्घटना वश शनिवार रात जो हादसा हुआ उसमें कांवड़िए शुभ मुहूर्त का इंतजार करते रहे। फिर भी जो हादसा हुआ उससे बड़ा खेद है। आगे कहा कि एक महीने से पहले जून अंत में कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह ने मेरठ में विभिन्न राज्यों के पुलिस, प्रशासन के अफसरों के साथ बैठक ली थी। उसमे ंस्पष्ट निर्देष दिया था कि कांवड़ की हाइट 12 फिट से अधिक नहीं होना चाहिए।
राली चौहान में जो घटना हुई उसमें 22 फिट की डीजे कांवड़ की हाइट थी। बिजली विभाग में रोड लेवल के लिए अलग अलग मानक बने हैं। इसी को देखते हुए कांवड़ की हाइट 12 फिट रखने का निर्णय बैठक में लिया गया था।
एमडी ने आगे सफाई देते हुए कहा कि जहां यह घटना हुई वहां सड़क की चौड़ाई कम थी। आसपास मलबा पड़ा था। गाड़ी घूमने लगी तो अचानक विचलन हुआ और उसका संतुलन बिगड़ गया। जिस कारण हमारे बिजली विभाग का जो 11केवी का लाइन जा रहा था उसमें केवल टच होने के कारण दुघर्टना हो गई। कहा कि लाइन टच होने से ऊर्जा तो लगी लेकिन हमारे विभाग की जो संपत्ति है वो हाईटेंशन लाइन तार नहीं टूटी।

कहा बिजली सुरक्षा विभाग की फर्स्ट रिपोर्ट के अनुसार कांवड़ की ऊंचाई के कारण ये हादसा हो गया। कहा कि शटडाउन की जो बात कही जा रही है उसमें स्पष्ट करना है कि किसी ने न तो फोन पर शटडाउन मांगा न लिखित में न मौखिक किसी ने हमसे शटडाउन मांगा है। पूरा लॉगशीट चैक किया है। उसमें कहीं भी शटडाउन का आवेदन नहीं है। शाम को 5.30 से 6.30 बजे तक शेड्यूल रोस्टिंग रहता है वो किया गया।

घटना के बाद अपने आप लाइन ब्रेकडाउन हो गया। शटडाउन जेई से पूछा गया था वो नहीं दिया वो हमारे पास की रिपोर्ट में कहीं नहीं हैं। कहा कि किसी बड़ी लाइन की ट्रिपिंग होती है तो मुख्यालय लेवल तक उसकी रिपोर्टिंग होती है।

22 फीट की हाइट के कारण यह हादसा हुआ है, अगर कांवड़ की हाइट हमारे अनुसार रखते तो हादसा नहीं होता। कहा कि हमारे पास लाइन क्लियरेंस के मानक हैं, प्रारंभिक जांच में विभाग के मानक वहां फॉलो हुए थे। वहां किसी ने मौखिक, लिखित शटडाउन नहीं मांगा। इसलिए हमारे विभाग की गलती हुई है यह साबित नहीं होता है। ऊर्जा निगम की कोई गलती नहीं मिली है। 12 फीट की कांवड़ लाने की हाइट डीजीपी की बैठक में तय हुई थी।
डीजे का जमीन से हाइट 6.70 मीटर था, हाईटेंशन लाइन की जमीन से हाइट 5.8 मीटर थी। 5.8 मीटर और 6.70 मीटर की हाइट में अंतर था इसलिए हादसा हुआ। कांवड़ में हाइट को मेंटेन नहीं किया गया।

बिजली विभाग की गलती नहीं हैं नो फॉल्ट लाइबिलिटी प्रावधान में मृतक के परिवारों को 1लाख रुपए का मुआवजा दे रहे हैं। घटना में बिजली विभाग की संपत्ति प्रभावित हुई है। पहली प्रायरिटी गांव में बिजली देना और मृतकों को नियमानुसार मुआवजा देना है।

कहा कि हेडक्वार्टर लेवल का डैशबोर्ड गलत नहीं बोलेगा उसमें गांव में 5.30 से 6.30बजे रोस्टिंग के तहत बिजली बाधित थी। एक जांच समिति बनाई है इसमें मुख्य अभियंता तकनीक, डीडी इलेक्ट्रिकल सुरक्षा और एक्सईएन को मिलाकर जांच समिति बनाई है। वो जांच कर रही है। आगे एमडी ने कहा कि डीएम मजिस्ट्रियल जांच करा रहे हैं उसमें मैं टिप्पणी नहीं करुंगी।

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