बीजेपी की पूर्व सांसद और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने हाल ही में चार धाम यात्रा और पर्यावरण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि भगवान भी चार धामों से भाग गए हैं। पिछले साल हेमकुंड साहिब से 700 जानवर गिरकर मारे गए, ऐसे में कौन भगवान वहां पर टिकेगा? मेनका गांधी ने कहा कि जहां कभी घास के मैदान और फूलों की खूबसूरती से स्वर्ग जैसा एहसास होता था, आज वहां जाना दिल तोड़ देता है।

कबूतरों पर की चिंता व्यक्त

मेनका गांधी ने पक्षियों, खासकर कबूतरों को लेकर हो रही बहस पर कहा कि कबूतर इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं हैं। दुनिया में कबूतरों से अब तक एक भी मौत नहीं हुई। मुंबई में कुल 57 कबूतरखाने हैं, जिनमें से 4-5 तोड़ दिए गए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अब कमेटी बनाई है और रिपोर्ट आने के बाद फिर से कबूतरखाने बनाए जाएंगे।

जंगली सूअरों को मारने के फैसले पर आपत्ती जताई

केरल सरकार के जंगली सूअरों को मारने के फैसले की भी मेनका गांधी ने आलोचना की। उनका कहना है कि यदि सूअरों को मारा गया तो अगले पांच सालों में वहां एक भी पेड़ नहीं बचेगा, क्योंकि जंगलों में फैलने वाला ब्रैकन फर्न केवल जंगली सूअरों द्वारा खाया जाता है। इस पौधे की वजह से पेड़ों की वृद्धि रुक जाती है।

कुत्तों के मामले में SC के फैसले पर सहमती जताई

मेनका गांधी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों पर आदेश का स्वागत किया। कोर्ट ने कहा कि जो कुत्ते फिलहाल शेल्टर होम में हैं, उन्हें बाहर छोड़ा जाए, लेकिन आक्रामक स्वभाव वाले कुत्तों और रेबीज से प्रभावित कुत्तों को बाहर नहीं छोड़ा जाएगा और उनकी नसबंदी (स्टेरिलाइजेशन) की जाएगी। मेनका गांधी ने इस फैसले पर सहमती जताई।

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