मुजफ्फरनगर। कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो सिर्फ खबर नहीं होतीं, बल्कि समाज के सीने पर गहरे घाव बना जाती हैं। रामपुरी शहाबुद्दीनपुर रोड स्थित श्मशान घाट के पास बुधवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने हर संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर दीं। सड़क किनारे एक माह की मासूम बच्ची मृत अवस्था में पड़ी थी और उससे भी अधिक हृदयविदारक यह कि आवारा कुत्ते उसके नन्हे-नन्हे हाथों और गले को नोच रहे थे। जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, जिसकी किलकारियां शायद अभी घर की दहलीज तक भी नहीं पहुंची थीं, वह इस बेरहमी का शिकार कैसे हो गई? यह सवाल हर किसी के दिल को छलनी कर रहा है। बताया गया कि शिवसेना मंडल उपाध्यक्ष गौतम कुमार वहां से गुजर रहे थे। अचानक उनकी नजर सड़क किनारे पड़े एक छोटे से शरीर पर पड़ी। पास जाकर देखा तो रूह कांप उठी क्योंकि वह एक नवजात का शव था और उसके आसपास आवारा कुत्ते घूम रहे थे। वह दृश्य इतना भयावह था कि कुछ पल के लिए सांसें थम गईं। गौतम कुमार ने तुरंत मानवता का परिचय देते हुए संबंधित थाने को फोन कर पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मगर जनता व कालोनीवासियों में इस बात के भी चर्चे खूब हो रहे हैं कि आखिर वह कौन है जिसने इस मासूम को इस हाल में यहां छोड़ दिया। क्या वह मां थी जिसने मजबूरी में ऐसा कदम उठाया, या कोई और जिसने इंसानियत को ही दफना दिया। स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त है। हर आंख नम और मन में एक ही बात गूंज रही हैं कि क्या एक नवजात की जिंदगी इतनी सस्ती हो गई। समाज की संवेदनाएं आखिर कहां चली गईं। लोग इसे मानवता पर लगा काला धब्बा बता रहे हैं।


शिवसेना पदाधिकारियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से मांग की है कि मामले की सख्ती से जांच हो, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए, अस्पतालों और दाइयों से पूछताछ की जाए और दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बन सके। उनका कहना है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस घटना ने नगर पालिका की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक को लेकर पहले भी शिकायतें होती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने का खामियाजा आज एक मासूम की लाश के अपमान के रूप में सामने आया। श्मशान घाट के पास पड़ा वह नन्हा शरीर सिर्फ एक बच्ची का शव नहीं था, वह हमारे समाज की संवेदनहीनता का आईना था। जिस उम्र में बच्चों को मां की गोद और प्यार की जरूरत होती है, उस उम्र में उसे मौत और अपमान मिला। आज मुजफ्फरनगर का हर संवेदनशील दिल यह दुआ कर रहा है कि उस मासूम की आत्मा को शांति मिले और उसके साथ हुई इस निर्ममता का सच जल्द सामने आए।

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