झारखंड की जेलों में बंद महिला कैदी अब सिर्फ सजा नहीं काट रहीं, बल्कि अपने हुनर से नई पहचान बना रही हैं। उनके हाथों से बने आर्टिफिशियल गजरे अब मुंबई के बाजारों में बिकने की तैयारी में हैं। इससे न सिर्फ उन्हें पहचान मिल रही है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का मौका भी मिल रहा है।
ये कभी मुरझाते नहीं हैं और लंबे समय तक चलते हैं
झारखंड की अलग-अलग जेलों में बंद महिला कैदियों द्वारा बनाए गए आर्टिफिशियल गजरे अब मुंबई के बाजारों में अपनी जगह बनाने जा रहे हैं। इन गजरों की खासियत यह है कि ये कभी मुरझाते नहीं हैं और लंबे समय तक चलते हैं। इन्हें बस अपने पसंदीदा इत्र से महका कर बालों में लगाया जा सकता है। महिला कैदियों का कहना है कि असली फूलों के गजरे एक ही दिन में खराब हो जाते हैं, लेकिन उनके बनाए गजरे लंबे समय तक नए जैसे दिखते हैं। इन गजरों को बनाने के लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बताया कि शुरुआत में ये गजरे पुरुष कैदी बनाते थे, लेकिन बाद में महिला कैदियों ने भी इसे बनाने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण दिया गया और उन्होंने बहुत अच्छे तरीके से गजरे तैयार किए। उन्होंने बताया कि महिला कैदी अब गजरे के साथ-साथ ज्वेलरी और कपड़े बनाना भी सीख रही हैं। उनके बनाए उत्पादों की फिल्म इंडस्ट्री में काफी मांग है और दक्षिण भारत में भी ये गजरे लोकप्रिय हैं।
फिलहाल मुंबई में इन गजरों के लिए बाजार तैयार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि महिला कैदियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। जेल प्रशासन का कहना है कि सजा पूरी होने के बाद रिहा होने पर इन महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
