कानपुर जिले के बिठूर स्थित राजा नर्सिंग होम में हुई मासूम की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर हुई मौत के बाद जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर अस्पताल का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर उसे पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया है।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट में सामने आया कि:

बिना अनुमति के एनआईसीयू: अस्पताल के पास एनआईसीयू चलाने की कोई कानूनी अनुमति नहीं थी। वह अवैध रूप से बच्चों का इलाज कर रहा था।

फेल सुरक्षा इंतजाम: अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) की वैधता बहुत पहले ही खत्म हो चुकी थी। यानी इमरजेंसी में आग बुझाने का कोई साधन वहां काम करने लायक नहीं था।

बड़ी लापरवाही: इसी लापरवाही की कीमत एक नवजात बच्ची को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

अस्पताल सील, डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज
प्रशासन ने अवैध रूप से चल रहे एनआईसीयू यूनिट को मौके पर ही सील कर दिया है। पीड़ित परिजनों की शिकायत पर बिठूर थाने में संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अस्पताल प्रबंधन को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का नोटिस दिया गया है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
यह बच्ची उस परिवार की पहली संतान थी। पहली खुशी के इस तरह मातम में बदलने से परिजनों में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि सिर्फ अस्पताल बंद करना काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदार डॉक्टरों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए वहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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