प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार माओवादी आतंकवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. माओवादी आतंकवादी संगठनों पर पुलिस कार्रवाई और उनके द्वारा किए जाने वाले हमलो से होने वाले रक्तपात पर उनका दर्द छलका. उन्होंने कहा कि हिंसा और रक्तपात देखकर मेरा मन दुखी होता है. छत्तीसगढ़ पिछले कई सालों से माओवादी आतंकवाद के खतरे से जूझ रहा है और अब जब 300 से ज्यादा माओवादियों ने सरेंडर किया तो दिल को थोड़ी राहत मिली. केंद्र सरकार का मकसद माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना है और इसमें सफल रहेंगे.

50-55 साल से झेल रहे माओवादी आतंकवाद

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान गुरुवार को छत्तीसगढ़ में 170 माओवादी आतंकवादियों के सरेंडर करने के बाद आई. उन्होंने कहा कि पिछले 3 दिन में 300 से ज्यादा माओवादी सरेंडर कर चुके हैं. पिछले 50-55 साल से देश माओवादी आतंकवाद का दंश झेल रहा है और आतंकी आज तक हजारों लोगों की जान ले चुके हैं. माओवादी आतंकी स्कूल खुलने नहीं देते, अस्पताल बनने नहीं देते, डॉक्टरों को काम करने नहीं देते, हमले और बमबारी करके लोगों की जान ले लेते हैं. माओवादी आतंकवाद युवाओं के साथ अन्याय है, उनकी जिंदगी को जहन्नुम से बदतर बनाकर रख देता है.

आतंकवाद को खत्म करने का संकल्प लिया था

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माओवादी आतंकवादियों का आतंक देखकर मैं बहुत परेशान होता था और आज सभी के सामने अपना दर्द बयां कर रहा हूं. पद ग्रहण करते हुए माओवादी आतंकवाद को खत्म करने का संकल्प लिया था. आतंकवाद की राह पर भटके युवाओं को मुख्यधारा से वापस जोड़ने का प्रयास शुरू किया और आज उन्हें प्रयासों का रिजल्ट देखकर राहत मिल रही है. सरेंडर करने वाले आतंकी सामान्य नहीं थे, उनके सिर पर इनाम था और अब जब उन्होंने सरेंडर किया किया तो हथियारों की खेप बरामद हुई. आज माओवादी आतंकवाद प्रभावित जिले 125 से घटकर 11 रह गए हैं.

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