भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगे यौन शोषण के आरोपों में हर दिन नया मोड़ नजर आ रहा है। एक तरफ पहलवानों ने गृहमंत्री से वार्ता कर सरकार को फैसला लेने का वक्त दिया है। इसके बाद शुक्रवार को पहलवान बृजभूषण सिंह के दिल्ली आवास पर पहुंचे। खिलाड़ियों के बदले रुख पर खाप चौधरी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
थांबेदारों ने कहा, ” बात देश के खिलाड़ियों के सम्मान की है, हम साथ खड़े हैं। आंदोलन होगा या समझौता। इससे हमारा मतलब नहीं है।” खाप चौधरियों ने कहा, “खिलाड़ी निर्णय लेने के लिए आजाद हैं। आंदोलन हुआ तो हम खिलाड़ी बेटियों के सम्मान में जंग का झंडा बुलंद करेंगे।”
गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह का कहना है कि खाप चौधरी न्याय के साथ हैं।हम शांतिपूर्वक तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। न्याय की मांग रहे हैं। आंदोलन में एक रुख है कि पहलवानों को न्याय मिले। दूसरा रुख सरकार ने बनाया। खाप चौधरी न्याय के साथ हैं। पहलवानों को फैसला करना है। शामली के बावड़ी गांव के रहने वाले श्याम सिंह लंबे समय से अपनी खाप के चौधरी है। अनुभवियों में गिने जाते हैं।
मुजफ्फरनगर के लाठियान खाप के चौधरी वीरेंद्र सिंह लाठियान का कहना है कि खिलाड़ियों की मर्जी है वो जो भी करें। हम लोगों ने पहलवानों का साथ दिया है। आगे भी जरूरत होगी तो उनका साथ देंगे। लेकिन पहलवानों के मन में क्या चल रहा है। इसका फैसला हम नहीं कर सकते। किसी के बारे में क्या कह सकते हैं। आंदोलन करना है या नहीं इसका फैसला पहलवान करेंगे।
हरियाणा, दादरी की फुगाट खाप के प्रधान बलवंत सिंह फुगाट का कहना है कि महिला पहलवान हमारी बहन, बेटियां हैं। उनके साथ गलत हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। चाहे कुछ करना पड़े। हमारी पूरी खाप, बिरादरियां उनके साथ हैं। 10 जून की एक बैठक इसी मसले पर सोनीपत में बुलाई गई है। जिसमें थांबेदारों और किसान नेताओं को बुलाया है। वहां आंदोलन को लेकर फैसला हो सकता है।
तालियान खाप के चौधरी सुधीर तालियान ने कहा, खिलाड़ियों से गलत व्यवहार हुआ है। उनके साथ अन्याय हो रहा है। इसलिए खाप चौधरियों ने खिलाड़ियों का समर्थन किया। क्योंकि प्रशासन, सरकार ने पहलवानों पर जुल्म किया है। खाप ने पहलवानों को जब समर्थन किया था। पुलिस, प्रशासन, सत्ता खिलाड़ियों की सुनवाई नहीं कर रहा था। चौधरियों ने कहा था समर्थन हम दे रहे हैं, साथ देंगे, लेकिन आंदोलन का फैसला पहलवान करेंगे। उनका फैसला था, हमारा समर्थन था, खिलाड़ी सत्ता पक्ष से पीड़ित थे। आज सत्ता के साथ उनका समझौता हो रहा है, तो उसमें हम कुछ नहीं कहेंगे। खाप चौधरियों को उससे परेशानी नहीं है। फैसला लेने को पहलवान स्वतंत्र है। उनके फैसले से हमें आपत्ति नहीं है।
राजकुमार करनावल का कहना है कि सामाजिक काम में भाग लेना, अन्याय के खिलाफ लड़ना ही खापों का उद्देश्य है। महिला पहलवानों के साथ अन्याय हुआ, तो हम उनके साथ खड़े हैं। आजादी से पहले और आजादी के बाद भी खाप चौधरियों ने शोषण के खिलाफ आवाज को हमेशा बुलंद किया है। खिलाड़ी जो फैसला लेंगे हम उन्हीं के अनुसार आगे बढ़ेंगे।
बड़ौत की देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं हमारी पूरी खाप, सारी बिरादरियां एक साथ हैं। जब कहेंगे खाप जाएगी। आगे कहते हैं कि बातचीत से ही समाधान निकलते हैं। अगर समाधान नहीं निकलता तो पहलवान जैसा चाहें वैसे हम उनके साथ हैं।
महिला पहलवानों के आंदोलन में सर्वखापों ने समर्थन दिया। सभी 36 बिरादरियों की खापों उनके मुखियाओं ने बेटियों के हक में आवाज उठाई। सोरम में 1 जून को सर्वखाप महापंचायत बैठी। जिसमें फैसला लिया गया कि महिला खिलाड़ियों पर हो रहे अन्याय की लड़ाई में सर्वखाप पूरी तरह साथ है। खापों के प्रधानों ने खिलाड़ियों को आशीर्वाद देकर साथ दिया।
खाप प्रमुखों ने कहा कि बेटियों के सम्मान के आंदोलन को जातियों में बांटना गलत है। पूरा समाज बेटियों के साथ है। सोरम के बाद कुरुक्षेत्र में हरियाणा की खापों की पंचायत हुई, उसमें भी महिला पहलवानों को खापों का समर्थन मिला। इसके बाद तय हुआ कि किसान नेता गृहमंत्री और राष्ट्रपति से मिलकर पहलवानों के लिए न्याय की मांग करेंगे।
