महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक प्रकाश सोलंके ने आरोप लगाया कि मराठा समुदाय से होने के कारण उन्हें नजरअंदाज किया गया और राज्य सरकार में मंत्री पद नहीं दिया गया। माजलगांव से चार बार विधायक चुने गए सोलंके ने रविवार को बीड में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि मराठा बीड जिले में राकांपा की ताकत रहे हैं, लेकिन जब समुदाय के किसी सदस्य को कैबिनेट या संरक्षक मंत्री पद देने की बात आती है तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। वह शुक्रवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख अजित पवार के उस बयान पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे उनके खिलाफ ‘‘जांच’’ में निर्दोष पाए जाते हैं, तो उन्हें फिर से ‘‘मौका’’ दिया जाएगा।

पवार पिछले साल बीड के सरपंच की हत्या मामले का स्पष्ट रूप से जिक्र कर रहे थे, जिसके बाद परली से विधायक मुंडे को इस साल मार्च में देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

मुंडे की कैबिनेट में वापसी की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर सोलंकी ने कहा, ‘‘शरद पवार, अजित पवार जैसे नेताओं ने हमेशा बीड जिले में ओबीसी समुदाय को प्राथमिकता दी है। मराठा समुदाय बीड में राकांपा समर्थक रहा है। पिछले 45 वर्ष में बीड जिले में ओबीसी और पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता दी गई है।’’ उन्होंने कहा कि इसके पीछे (समाज सुधारकों) ज्योतिराव फुले, राजर्षि शाहू महाराज और बी आर आंबेडकर की विचारधारा का पालन करने की पार्टी की नीति है। उन्होंने कहा कि लेकिन जिस समुदाय ने पार्टी को ताकत दी वह कैबिनेट या संरक्षक मंत्री के पद से दूर है। उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी को इसके बारे में सोचना चाहिए।’’ सोलंके पहले महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं।

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