मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को कहा कि मध्यप्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य निर्धारण में एक मील का पत्थर हासिल किया है, जिसमें शुल्क तीन रुपये प्रति यूनिट से कम हो गया है। उन्होंने कहा कि यह देश में पहली बार है, जब नवीकरणीय ऊर्जा का शुल्क 2.70 रुपये प्रति यूनिट पर आ गया है।

एक आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है। उन्होंने कहा कि मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना से पूरे देश में ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और भंडारण की नई राह खुलेगी।

यादव ने मुरैना परियोजना में प्राप्त की गई सफलता के आधार पर लंबे समय की ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना में प्राप्त किया गया कम शुल्क प्रदर्शित करता है कि नवकरणीय ऊर्जा भी डिस्कॉम के लिए अधिक किफायती हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना 95 प्रतिशत वार्षिक उपलब्धता के साथ भारत की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बन गई है। उन्होंने कहा कि अब तक देशभर की परियोजनाओं में केवल 50 प्रतिशत ‘पीक ऑवर्स’ उपलब्धता और 85 प्रतिशत वार्षिक उपलब्धता सुनिश्चित हो पाती थी।

यादव ने कहा, मुरैना परियोजना इस ट्रेंड को बदलते हुए ‘पीक ऑवर्स’ में 95 प्रतिशत आपूर्ति के नए मानक स्थापित करेगी। यादव ने कहा कि मुरैना सोलर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया गया है, जिसने पहले भी प्रतिष्ठित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित किया है।

उन्होंने कहा, मुरैना परियोजना से उत्पादित बिजली राज्य द्वारा खरीदी जाएगी। मुरैना सोलर पार्क में दो यूनिट स्थापित की जा रही हैं, प्रत्येक इकाई से तीनों चरणों में 220 मेगावॉट क्षमता ऊर्जा का उत्पादन होगा।

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