शुक्रवार की सुबह, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा पर राज्यसभा ने एक वैधानिक प्रस्ताव पारित किया। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर 12 घंटे से अधिक चर्चा के बाद, सुबह 2.36 बजे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में वैधानिक प्रस्ताव पेश किया। शाह सहित 11 वक्ताओं की चर्चा के बाद सुबह 3.58 बजे सदन ने इसे मंजूरी दे दी। लोकसभा में गुरुवार को सुबह 2.40 बजे प्रस्ताव पारित होने के एक दिन बाद उच्च सदन में यह प्रस्ताव पारित हुआ। लोकसभा में शाह ने सुबह 2 बजे प्रस्ताव पेश किया था।

गुरुवार शाम को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अध्यक्ष से मणिपुर पर चर्चा अगले दिन के लिए निर्धारित करने का अनुरोध किया, क्योंकि वक्फ विधेयक पर चर्चा देर रात तक जारी रहेगी और मणिपुर के लिए बहुत कम समय बचेगा। इस अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया गया। अध्यक्ष ने सदन को सूचित किया कि यह मामला गुरुवार के एजेंडे में सूचीबद्ध है। बाद में जब अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इसी तरह का अनुरोध किया, तो शाह ने जवाब दिया, “मणिपुर एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। आप आज रात एक बार देर रात तक काम क्यों नहीं करते?”

शाह ने सदन में कहा कि मणिपुर के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था जिसके बाद राज्यपाल ने विधायकों से चर्चा की और बहुमत सदस्यों ने कहा कि वे सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं। शाह ने कहा कि इसके बाद कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की जिसे राष्ट्रपति महोदया ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप मैं दो महीने के अंदर इस संबंध में सदन के अनुमोदन के लिए सांविधिक संकल्प लाया हूं।’’ शाह ने कहा कि सरकार की पहली चिंता मणिपुर में शांति स्थापित करने की है और वहां पिछले चार महीने से एक भी मौत नहीं हुई है और केवल दो लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि मणिपुर में 260 लोग जातीय हिंसा में मारे गये किंतु वह सदन को बताना चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा में इससे ज्यादा लोग मारे गये। 

गृह मंत्री ने मणिपुर में हालात बिगड़ने के पीछे एक अदालती निर्णय को मूल कारण बताया जिसमें एक जाति को आरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि इस अदालती निर्णय पर अगले ही दिन उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा किसरकार चाहती है कि मणिपुर में जल्द शांति हो, पुनर्वास हो और लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया जाए। गृह मंत्री ने विपक्षी दलों से मणिपुर के मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील की। इससे पहले विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मणिपुर में इतनी हिंसा के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उस राज्य में जाने का मौका अभी तक नहीं मिल पाया। 

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