मकर संक्रांति सनातन धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में खिचड़ी, उत्तरायण, पोंगल और माघी जैसे नामों से मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और गंगा स्नान, दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। लेकिन साल 2026 में 23 वर्षों बाद मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी का संयोग बन रहा है, जिससे श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार खिचड़ी खा सकते हैं?

PunjabKesari Makar Sankranti

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी कारण इस दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसी दिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जो भगवान विष्णु को समर्पित व्रत तिथि मानी जाती है।

एकादशी पर चावल क्यों होता है वर्जित
धर्मशास्त्रों में एकादशी के दिन अन्न, विशेषकर चावल का सेवन, स्पर्श और दान निषिद्ध बताया गया है। मान्यता है कि एकादशी पर चावल ग्रहण करने से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है। चूंकि खिचड़ी चावल से बनाई जाती है, इसलिए मकर संक्रांति 2026 के दिन खिचड़ी खाना और उसका दान करना शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है।

PunjabKesari Makar Sankranti

तो क्या मकर संक्रांति पर कुछ भी दान नहीं होगा?
ऐसा नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर दान का महत्व बना रहेगा, लेकिन चावल से बने पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

मकर संक्रांति 2026 पर क्या करें दान
इस दिन आप निम्न वस्तुओं का दान कर सकते हैं तिल और गुड़, तिल से बने लड्डू, घी, तेल और कंबल, ऊनी वस्त्र, तिल से बनी खिचड़ी (बिना चावल), तिल को पाप नाशक माना गया है और तिल दान से सूर्य देव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।

मकर संक्रांति 2026 में एकादशी के कारण चावल और खिचड़ी का सेवन व दान वर्जित रहेगा, लेकिन तिल और गुड़ का दान करके आप दोनों पर्वों का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। श्रद्धा के साथ-साथ शास्त्रों के नियमों का पालन करना ही सर्वोत्तम माना गया है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights