एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में मध्यस्थता के चीन के दावे पर बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया दी है। हैदराबाद के सांसद ने कहा कि चीन के इस दावे पर भारत चुप नहीं बैठा रह सकता। उन्होंने मोदी सरकार से कहा है कि उसे आधिकारिक तौर पर इस दावे का खंडन करना चाहिए और भरोसा जताना चाहिए कि भारत को तीसरी पार्टी की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।

‘संबंधों में सुधार संप्रभुता की कीमत पर नहीं’

ओवैसी ने एक के बाद एक कई एक्स पोस्ट करके बुधवार रात को चीन के दावे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए केंद्र की मोदी सरकार से तीखे सवाल पूछ लिए हैं। हैदराबाद के सांसद ने लिखा है, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति के सीजफायर की घोषणा और शांति सुनिश्चित करने के लिए व्यापारिक पाबंदियों के इस्तेमाल के दावे के बाद अब चीन के विदेश मंत्री ने आधिकारिक तौर पर इसी तरह के दावे किए हैं। यह भारत का अपमान है और सरकार को इसका कड़ाई से जवाब देना चाहिए। चीन के साथ संबंधों में सुधार भारत के सम्मान और संप्रभुता की कीमत पर नहीं किया जा सकता।’

‘क्या मोदी सरकार इसी पर तैयार हुई थी?’

बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी मोदी सरकार की ओर से दुनिया भर के देशों में भेजे गए उस प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा रह चुके हैं, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद की परिस्थितियों को लेकर भारत का पक्ष रखने के लिए गया था। उनका कहना है कि ‘चीन, भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखना चाहता है और खुद को दक्षिण एशिया में श्रेष्ठ साबित करना चाहता है। क्या जब प्रधानमंत्री चीन गए थे, तब मोदी सरकार इसी पर तैयार हुई थी?’

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ओवैसी बोले यह दावा अस्वीकार्य है

एआईएमआईएम के मुताबिक ‘एक तरफ तो चीन पाकिस्तान को 81% हथियार की सप्लाई करता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रियल टाइम इंटेलिजेंस उपलब्ध करवा रहा था और दूसरी तरफ यह मध्यस्थता का दावा करता है। यह अस्वीकार्य है और एक देश के तौर पर चुपचाप नहीं लिया जा सकता।’

मोदी सरकार ने दावे का किया खंडन

हालांकि, बुधवार (31 दिसंबर, 2025) को सरकार ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में मध्यस्थता करने के दावे का खंडन किया है। सरकार पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे ही दावों को खारिज कर चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ‘तीसरे पक्ष की मध्यस्थता’ के खिलाफ भारत का स्टैंड नहीं बदला है।

भारत-पाक में मध्यस्थता का दावा किया था

इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक संबोधन में दावा किया था कि ‘लंबे समय की शांति बहाली के लिए, हमने एक निष्पक्ष और न्यायसंगत रुख अपनाया है; जिसमें लक्षणों और मूल कारणों दोनों को दूर करने पर फोकस किया है। गर्मागरम मुद्दों के समाधान के लिए चीन की ओर से अपनाए गए दृष्टिकोण की वजह से हमनें….पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव में मध्यस्थता की…।’

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