भारत अपनी सामरिक शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी छलांग लगाने वाला है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस मिलकर 800 किलोमीटर रेंज वाले हाई-सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के परीक्षण के अंतिम चरण में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एडवांस वर्ज़न अगले दो सालों के भीतर ऑपरेशनल हो जाएगा।

ब्रह्मोस की ताकत और इतिहास
ब्रहमोस का सफर 280 किमी रेंज से शुरू हुआ था। 2017 में Aero India प्रदर्शनी के दौरान मिसाइल की रेंज को 450 किमी तक बढ़ाने की जानकारी दी गई। अब DRDO और ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने रेंज को 800 किमी तक विस्तारित करने के लिए रैमजेट इंजन, ईंधन दक्षता और नेविगेशन प्रणाली में सुधार किया है। इस एडवांस वर्ज़न की खासियत यह होगी कि इसे मौजूदा लॉन्च प्लेटफॉर्म से आसानी से फायर किया जा सकेगा।

ऑपरेशन सिंदूर और सामरिक प्रभाव
भारत ने पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस का पाकिस्तान के खिलाफ सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में दुनिया के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के पास ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट करने की क्षमता नहीं है। ऐसे में 800 किमी रेंज वाला नया वर्ज़न पाकिस्तान और चीन के लिए बड़े चुनौती बनेगा। भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट विजयेन्द्र ठाकुर ने बताया कि नया ब्रह्मोस संशोधित रैमजेट इंजन, बेहतर ईंधन दक्षता, ग्लोबल सैटेलाइट नेविगेशन और जाम-प्रतिरोधक क्षमता से लैस होगा। इसका परीक्षण अब केवल Inertial Navigation System (INS) और नेविगेशन सटीकता पर केंद्रित है।

ब्रहमोस की नई रेंज हासिल करने के लिए मिसाइल की ऊँचाई पर क्रूज करने की क्षमता बढ़ाई गई और रैमजेट इंजन का प्रदर्शन ऑप्टिमाइज किया गया। इसके अलावा, नॉन-मेटैलिक एयरफ्रेम कंपोनेंट्स और हल्के कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल करके वजन घटाया गया है। मिसाइल की बाहरी आकृति में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं, ताकि मौजूदा लॉन्च सिस्टम से इसे आसानी से फायर किया जा सके। भारत का यह एडवांस ब्रह्मोस वर्ज़न न सिर्फ मिसाइल रेंज को दोगुना करेगा, बल्कि देश की सामरिक मारक क्षमता को भी अगले स्तर पर ले जाएगा।

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