सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि भारतीय सशस्त्र बल “पांचवीं पीढ़ी के युद्धों” के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जो प्रत्यक्ष संघर्ष के बजाय रणनीतिक चाल और मनोवैज्ञानिक दबदबे पर आधारित होते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के संघर्षों में पारंपरिक ताकत और आधुनिक क्षमताओं के मिश्रण की आवश्यकता होगी, जहां सैनिकों को रोबोट के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा।

सेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक “ऐतिहासिक, खुफिया सूचना पर आधारित प्रतिक्रिया बताया, जिसने भारत के आतंकवाद-रोधी सिद्धांत को पुनः परिभाषित किया।”

उन्होंने कहा कि इसने भारत की “सटीक, दंडात्मक और समन्वित कार्रवाई” करने की क्षमता को प्रदर्शित किया है, जिससे पाकिस्तान को 88 घंटों के भीतर युद्ध विराम की मांग करने पर मजबूर होना पड़ा। 

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में उन्होंने कहा कि 88 घंटे का यह अभियान “पैमाने, सीमा, गहराई और रणनीतिक प्रभाव की दृष्टि से अभूतपूर्व” था। 

एक प्रेस बयान के अनुसार, जनरल द्विवेदी ने सोमवार को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी-मद्रास में एक शोध प्रकोष्ठ ‘अग्निशोध’ का उद्घाटन किया। वह दो दिन की चेन्नई यात्रा पर हैं।

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