मध्य प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और नागौद से पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह का शनिवार 14 मार्च को निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और भोपाल के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके निधन की खबर से विंध्य क्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

सरपंच से शुरू हुआ था सियासी सफर

5 जून 1953 को एक साधारण परिवार में जन्मे यादवेन्द्र सिंह ने जमीनी स्तर से राजनीति की शुरुआत की थी।

  • 1978: पहली बार वसुधा ग्राम पंचायत के सरपंच निर्वाचित हुए।
  • 1990 का दशक: जनपद पंचायत उपाध्यक्ष और कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष जैसे पदों पर रहकर जनता की सेवा की।
    • 2013: कांग्रेस के टिकट पर नागौद विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।

    बगावत और भाजपा का दामन

    यादवेन्द्र सिंह का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद साल 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने बसपा (BSP) के टिकट पर चुनाव लड़ा जिसका सीधा असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण की और अंत तक भाजपा से जुड़े रहे।

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    आज होगा अंतिम संस्कार

    यादवेन्द्र सिंह की पार्थिव देह शनिवार देर रात उनके पैतृक गांव कचनार (जिला सतना) पहुंच गई है। रविवार को उनके पैतृक गांव में ही राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन पर भाजपा के दिग्गज नेताओं और कांग्रेस नेता अजय सिंह ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।

    राजनीतिक विरासत

    यादवेन्द्र सिंह की विरासत को उनके परिवार ने भी आगे बढ़ाया है। उनकी पुत्रवधू प्रतिभा यतेंद्र सिंह वर्तमान में नागौद नगर परिषद की अध्यक्ष हैं जबकि उनके पुत्र यतेंद्र सिंह पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं

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