समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग के नए आदेश पर ऐतराज जताया हैं जिसमें बुर्के वाली महिलाओं की पहचान के लिए प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जाने की बात कही गई है. सपा ने कहा कि ये नियम गाइडलाइंस के खिलाफ है और एक खास वर्ग की महिलाओं को टारगेट करने के लिए बनाया है. 

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने इस संबंध में केंद्रीय चुनाव आयोग को ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति जताई है. सपा ने कहा कि ये चुनाव आयुक्त का ये आदेश भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के खिलाफ है. जो एक विशेष समुदाय की महिला मतदाताओं को निशाना बनाता है. चुनाव आयोग को इन निर्देशों को वापस लेना चाहिए. ये बीजेपी व सहयोगी दलों के दबाव में दिया गया है. 

सपा ने नए निर्देशों पर जताया ऐतराज

सपा ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा- चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव में बुर्केवाली महिला मतदाताओं की पहचान के लिए हरेक पोलिंग स्टेशन पर आंगनवाड़ी सेविकाओं द्वारा जांच किए जाने और महिला मतदाता को मतदान करने के संबंध में नए निर्देश सख्ती से लागू करने और देश में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इसे लागू करने के निर्देश दिए हैं. 

उल्लेखनीय है कि मतदान के दिन बुर्केवाली महिला मतदाताओं की पहचान के लिए बीजेपी व सहयोगी दलों ने इसकी मांग चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से की थी. चुनाव आयोग ने इनके दवाब में ही ये आदेश जारी किया है.

आदेश को वापस लेने की मांग

सपा ने कहा कि चुनाव आयुक्त का नया आदेश भारतीय चुनाव आयोग की गाइड लाइंस के विपरीत है. वोटिंग के दिन मतदान अधिकारी को ही मतदाता पहचान पत्र की जांच करने का अधिकार है. सपा ने दावा किया है कि चुनाव आयुक्त ने नियमों के विपरीत जाकर नया निर्देश जारी किया है. जो आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है. 

सपा ने आरोप लगाया कि नया आदेश एक विशेष संप्रदाय को निशाना बनाने के लिए हैं. सपा ने चुनाव आयुक्त के इस आदेश को वापस लेने की मांग की ताकि देश में पारदर्शी, स्वतंत्र भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराये जा सकें.  

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