तेलंगाना की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक नया पत्ता फेंका है — एन. रामचंदर राव को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर। लंबे समय से पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे राव को मंगलवार को आधिकारिक रूप से राज्य इकाई का प्रमुख घोषित कर दिया गया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी की जगह ली है। हालांकि, इस नए नेतृत्व के एलान के साथ ही पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी भी भड़क गई है। बीजेपी के फायरब्रांड नेता और गोशामहल से विधायक टी. राजा सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि नई नियुक्ति ने संगठन को एकजुट करने की बजाय, कुछ हिस्सों में दरारें पैदा कर दी हैं।
कौन हैं एन. रामचंदर राव?
एन. रामचंदर राव का नाम आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजनीति में नया नहीं है। छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय राव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर चुके हैं।
उनका लंबा राजनीतिक अनुभव, आरएसएस से मजबूत जुड़ाव, और संगठनात्मक क्षमता उन्हें भाजपा के लिए एक भरोसेमंद चेहरा बनाते हैं। वह पहले एमएलसी, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और संयुक्त आंध्र प्रदेश में संगठन सचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। राव पेशे से वकील हैं और राजनीतिक रणनीति के जानकार माने जाते हैं।
उनके पक्ष में क्या गया?
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए कई नामों की चर्चा थी। टी. राजा सिंह, डी. अरविंद और राजेंद्र जैसे नेताओं को भी संभावित दावेदार माना जा रहा था। लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अंततः राव के नाम पर मुहर लगाई।
इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
-संगठन के साथ चार दशक से भी लंबा जुड़ाव
-जमीनी स्तर पर पार्टी को विस्तार देने का अनुभव
-आरएसएस और एबीवीपी के साथ मजबूत संबंध
-ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखना, जो राज्य में चुनावी गणित में महत्वपूर्ण माना जाता है
-साफ-सुथरी छवि और कानूनी पृष्ठभूमि, जिससे वे नीति-निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं
नई नियुक्ति, नई चुनौती — लेकिन पार्टी में असहमति भी
राव को यह ज़िम्मेदारी ऐसे वक्त मिली है जब तेलंगाना में बीजेपी को कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल से कड़ी टक्कर मिल रही है। आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूत करना, बूथ स्तर तक कैडर को सक्रिय करना और अंदरूनी मतभेदों को शांत करना — ये सभी काम राव के एजेंडे में सबसे ऊपर होंगे। लेकिन जिस तरह टी. राजा सिंह ने पार्टी छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया है, वह संकेत देता है कि यह राह इतनी आसान नहीं होगी। राजा सिंह पहले ही खुलकर कह चुके हैं कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में नजरअंदाज किया गया। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व को अब संगठनात्मक स्तर पर एकता कायम करने के लिए अधिक मेहनत करनी होगी।
एन. रामचंदर राव को अब तेलंगाना में भाजपा को फिर से संगठित करना है और 2029 के विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करनी है। साथ ही, उन्हें पार्टी के भीतर की नाराजगी और गुटबाज़ी को संभालते हुए एक मजबूत, समन्वित नेतृत्व स्थापित करना होगा।
