दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानसून में भीषण जलभराव को रोकने के लिए बारापुला नाले की सफाई की आवश्यकता जताते हुए एक जून से मद्रासी कैंप को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अलावा विस्थापित लोगों को नरेला में बसाने का भी आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी एस अरोड़ा की पीठ ने नौ मई को अपने आदेश में कहा, ‘‘अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई व्यवस्थित तरीके से की जानी चाहिए। बारापुला नाले को जाम से मुक्त कराने के लिए मद्रासी कैंप के निवासियों का पुनर्वास भी आवश्यक है। कोई भी निवासी पुनर्वास के अधिकार से इतर किसी अन्य अधिकार का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि यह सार्वजनिक भूमि है, जिस पर अतिक्रमण किया गया है।’’

मद्रासी कैंप के निवासियों के 20 मई से सुचारू पुनर्वास के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने अवैध तरीके से रह रहे परिवारों को बारापुला नाले को जाम से मुक्त कराने के लिए अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण हटाने के वास्ते ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया था।

अदालत ने कहा कि विशेष रूप से निकटवर्ती मानसून के मौसम को देखते हुए पुनर्वास अत्यंत आवश्यक है, साथ ही बारापुला नाले की समय पर सफाई आसपास के क्षेत्रों में गंभीर जलभराव को रोकने के लिए भी जरूरी है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली सरकार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों को 19 से 20 मई तक दो शिविर आयोजित करने का आदेश दिया गया।

मुद्दा नालों पर अवैध अतिक्रमण को लेकर था, जिसके कारण नालियां अवरुद्ध हो रही थीं और नदी प्रदूषित हो रही थी। अदालत ने मद्रासी कैंप को अवैध निर्माण बताते हुए कहा कि इससे नाले में रुकावट पैदा हुई और नाला अवरुद्ध हो गया, जिसके कारण बारिश के दौरान, खासकर मानसून के मौसम में, आसपास के इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया।

पीठ ने कहा कि 20 मई से 31 मई के बीच मद्रासी कैंप से सभी सामान हटा दिए जाने चाहिए और एक जून से तोड़फोड़ शुरू होनी चाहिए। अदालत ने अतिक्रमण-रोधी अभियान पर रोक लगाने की मद्रासी कैंप के कई निवासियों की अर्जी का निपटारा किया और कहा कि यह मामला 10 महीने से अधिक समय से उसके संज्ञान में है।

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