बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है और हालात दिन-ब-दिन अधिक भयावह होते जा रहे हैं। चंद दिनों के भीतर छह हिंदुओं की बेरहमी से हत्या ने पूरे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।बांग्लादेश अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा के एक भयावह दौर में प्रवेश कर चुका है। बीते 24 घंटे के भीतर दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि एक विधवा महिला के साथ बलात्कार के बाद उसे मारने की कोशिश किए जाने की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था बुरी तरह चरमराई
इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है। सोमवार को हुई इन घटनाओं को बीते एक महीने में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में तेज बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है। यह बीते तीन सप्ताह में हिंदू समुदाय के खिलाफ पांचवीं बड़ी हिंसक घटना बताई जा रही है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में लगातार हो रही ये घटनाएं चुनाव से पहले सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा की यह श्रृंखला देश में अस्थिरता और भय का माहौल पैदा कर रही है।

मोनिरामपुर में हिंदू व्यापारी की हत्या
सोमवार शाम को जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला में 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात 5 जनवरी को कपालिया बाजार में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 5:45 बजे अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर गोलियां चला दीं। गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया है कि राणा प्रताप बैरागी रोजमर्रा के काम से बाजार आए थे, तभी उन्हें निशाना बनाया गया। अब तक हत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस ने न तो किसी गिरफ्तारी की जानकारी दी है और न ही किसी संभावित वजह पर आधिकारिक बयान जारी किया है।

विधवा से बलात्कार, हत्या की कोशिश
इसी दौरान सामने आई एक अन्य घटना में एक विधवा महिला के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसे मारने की कोशिश की गई। यह घटना अल्पसंख्यक महिलाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

यूनुस प्रशासन खामोश क्यों?
लगातार हो रही हत्याओं और हमलों के कारण हिंदू समुदाय में भय का माहौल है। कई लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।इन घटनाओं के बाद यूनुस प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। न तो कड़े बयान सामने आए हैं और न ही किसी विशेष सुरक्षा योजना की घोषणा। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह खामोशी हिंसा करने वालों का हौसला बढ़ा रही है। बांग्लादेश आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था तीनों की एक साथ परीक्षा हो रही है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights