दिल्ली से सटे नोएडा के एक नामी निजी स्कूल की शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। जहां UKG में पढ़ने वाला एक मासूम बच्चा स्कूल बस के भीतर करीब 7 घंटे तक बंद रहा। तपती धूप और बंद बस में बच्चा घंटों रोता-बिलखता रहा, लेकिन ना तो बस चालक को इसकी भनक लगी और ना ही स्कूल प्रशासन को। यह मामला तब खुला जब छुट्टी के वक्त बच्चा घर नहीं पहुंचा।

कैसे हुई इतनी बड़ी चूक? 
गुरुवार की सुबह महागुण मजेरिया सोसाइटी का रहने वाला एक छात्र रोजाना की तरह स्कूल बस में सवार हुआ। सफर के दौरान बच्चा बस की पिछली सीट पर सो गया। जब बस स्कूल पहुंची, तो अटेंडेंट की लापरवाही के कारण बच्चा अंदर ही छूट गया और बाकी बच्चे उतर गए। चालक और कंडक्टर ने बस की जांच किए बिना उसे स्कूल से 25 किलोमीटर दूर एक यार्ड में ले जाकर खड़ा कर दिया और लॉक लगा दिया। बच्चा बंद बस के अंदर मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन दूर-दूर तक कोई सुनने वाला नहीं था।

स्कूल में एब्सेंट, बस में प्रजेंट!
इस घटना ने स्कूल के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। जब दोपहर को बच्चे की मां उसे लेने बस स्टॉप पहुंची और बच्चा नहीं मिला, तो हड़कंप मच गया। स्कूल के रिकॉर्ड में बच्चा ‘एब्सेंट’ (अनुपस्थित) था, लेकिन बस की अटेंडेंस शीट में उसे ‘प्रजेंट’ दिखाया गया था। बदहवास परिजनों ने जब तलाश शुरू की, तो बच्चा स्कूल से 25 किलोमीटर दूर खड़ी बस में सहमा हुआ मिला।

स्कूल प्रबंधन की सफाई
मामला बढ़ने पर स्कूल प्रशासन ने बयान जारी किया। स्कूल का कहना है कि बस में अचानक आई तकनीकी खराबी की वजह से बस बदलनी पड़ी थी, जिसके कारण भ्रम हुआ और बच्चा पुरानी बस में ही रह गया। स्कूल ने दावा किया कि जैसे ही मामला संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई कर बच्चे को सुरक्षित ढूंढ लिया गया। प्रशासन ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।

अभिभावकों में भारी आक्रोश
परिजनों का सवाल है कि अगर गर्मी ज्यादा होती या बच्चे के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? फिलहाल बच्चा सुरक्षित है, लेकिन इस घटना ने नोएडा के तमाम निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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