उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। एक बेबस मां, जिसके पास प्रसव के समय कोई मदद करने वाला नहीं था, उसने असहनीय दर्द से तंग आकर मौत और जिंदगी के बीच एक खौफनाक कदम उठा लिया।

बेबसी और दर्द की दास्तां
मामला बौंडी थाना क्षेत्र के नंदवल गांव का है। जहां 38 साल की ननकई के सिर पर दुखों का पहाड़ पहले ही टूटा हुआ था। 6 महीने पहले बीमारी से उसके पति की मौत हो गई थी। घर में चार बेटे हैं, जिनमें सबसे बड़ा 16 साल का है। गुरुवार दोपहर जब ननकई को अचानक प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हुई, तब घर पर कोई नहीं था। बच्चे बाहर खेल रहे थे।

जब दर्द बना जल्लाद
अकेली ननकई दर्द से चीखती रही, हाथ-पैर पटकती रही, लेकिन उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो उसने एक खौफनाक फैसला लिया। किचन में रखे चाकू को उठाकर उसने अपना ही पेट चीर डाला। यह कदम उसने दर्द से छुटकारा पाने के लिए उठाया था, लेकिन इसकी वजह से उसकी अंतड़ियां तक बाहर आ गईं और पूरा कमरा खून से लाल हो गया।

कुदरत का करिश्मा और सफल डिलीवरी
चीख-पुकार सुनकर जब पड़ोसी पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। ननकई लहूलुहान हालत में तड़प रही थी। आनन-फानन में उसे एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने चमत्कारिक रूप से ननकई की नॉर्मल डिलीवरी कराई। ननकई ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है, लेकिन खुद उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

लखनऊ रेफर, जिंदगी के लिए संघर्ष जारी
अस्पताल के CMS डॉ. एन.एन. त्रिपाठी ने बताया कि महिला ने चाकू से पेट पर बहुत गहरा घाव किया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है। बेहोश होने से पहले ननकई ने बस इतना कहा कि दर्द इतना तेज था कि सहन नहीं हुआ, इसलिए पेट फाड़ लिया।

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