भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और डेपसांग मैदानी क्षेत्रों में टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी शुरू कर दी है।

सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास से सैनिकों की वापसी और गश्ती को लेकर समझौता हुआ था जो चार साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।

सूत्रों ने कहा कि डेमचोक और डेपसांग मैदानी क्षेत्रों में टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी शुरू हो गई है। जून 2020 में गल्वान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच भीषण संघर्ष के बाद संबंधों में तनाव आ गया था।

भारत और चीन के बीच में लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से पीछे हटने के समझौते में एक बिंदु यह भी जोड़ा गया कि सेना सैनिक प्रोटोकॉल के अनुसार हथियारों के साथ पेट्रोलिंग के करेंगे लेकिन कभी भी एक-दूसरे के साथ हाथापाई नहीं करेंगे।

समझौते के तहत सबसे विवादित स्थल डेपसांग और डेमचोक सीमा से भारत और चीन की सेना 29 अक्टूबर तक हट जाएगी। हालांकि चीन की तरफ से ज्यादा ढांचा बनाने के कारण उन्हें हटाने में एक-दो दिन का समय और लगता है।

समझौता के  मुताबिक दोनों सेनाओं को सभी तरह के ढांचा हटाने हैं और अप्रैल 2020 की स्थिति में लौटना है। सत्यापन करने के बाद दोनों ही सेनाएं फिर से 2020 की स्थिति के अनुसार पेट्रोलिंग कर सकेंगी।

भारतीय सेना सूत्रों के अनुसार 22 अक्टूबर को लद्दाख चीन बार्डर पर कोर कमांडर स्तर की बैठक में हुए समझौते में स्पष्ट तौर पर अप्रैल 2020 की स्थिति में लौटने पर सहमति बनी। समझौते के अनुसार डेपसांग मैदान और डेमचोक से भी सेनाएं पूरी तरह से पीछे हटेंगी और जिसने जो भी ढांचा बनाया है, चाहे वह ईट, गारे का हो या टिनशेड हों, वाहन, टैंक आदि सभी वापस लेकर जाएंगे।

समझौते के अनुसार 29 अक्टूबर तक सभी ढांचा हट जाए चाहिए लेकिन चीन ने ज्यादा ढांचा बना दिये हैं। उसकी नजर कई वर्षों से डेपसांग मैदान पर थी इसलिए इस बार वह पूरी तैयारी के साथ, फिर न लौटने के लिए आया था। लेकिन राजनायिक प्रतिवद्धताओं के कारण उसे पीछा हटना पड़ा।

उसे अपना साजो-सामान हटाने में एक-दो दिन अधिक लग सकते हैं। 29 अक्टूबर के बाद दोनों सेनाएं पीछे हटने का सत्यापन करेंगे और सीमा रेखा की पहचान करेंगे। उसके बाद दीपावाली के आसपास दोनो सेनाएं अप्रैल 2020 की स्थिति के  अनुसार गश्त लगा सकेंगे।

सैन्य सूत्रों का कहना है कि समझौते में महत्वपूर्ण बिंदु जोड़ा गया है कि गश्त के दौरान सेना एक दूसरे के साथ फेसऑफ नहीं करेंगे। दोनों पक्ष एक दूसरे के करीब भी नहीं आयेंगे। यदि कोई विवाद होगा तो वे बैनर दिखाकर विरोध दर्ज करेंगे और फिर कोर कमांडर स्तर पर बैठक कर विवाद को सुलझाया जाएगा।

समझौते के मुख्य बिंदु

► सैनिकों की वापसी : समझौते के अनुसार, दोनों सेनाएं 29 अक्टूबर तक अपनी-अपनी स्थिति से पीछे हटेंगी।

► सामग्री हटाना : सभी निर्माणों (ईट, गारे, टिन शेड, आदि) को हटाना होगा, और सेनाएं अप्रैल 2020 की स्थिति में लौटेंगी।

► गश्त के नियम : गश्त के दौरान सेनाएं एक-दूसरे के साथ आमने-सामने नहीं आएंगी। यदि विवाद होगा, तो बैनर दिखाकर विरोध दर्ज किया जाएगा और फिर उच्चस्तरीय बैठक के जरिए सुलझाया जाएगा।

► सुरक्षा और निगरानी : दोनों पक्ष लगातार बैठकें करेंगे और सीमा की निगरानी करेंगे।

► मुलाकात का अवसर : इस समझौते के बाद ही रूस में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनिपंग की मुलाकात संभव हो पाई।

यह समझौता पिछले चार वर्षो के तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और दोनों देशों के बीच विश्वास पुर्नस्थापित करने का प्रयास है।

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