आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरूवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के राजधानी में अधिक पुराने वाहनों में ईंधन भरने पर प्रतिबंध लगाने के हालिया आदेश को ‘मध्यम वर्ग पर एक और हमला’ करार दिया। भाजपा सरकार ने इस कदम का समर्थन करते हुए इसे प्रदूषण नियंत्रण के अपने प्रयासों में एक आवश्यक प्रयास बताया है, जिसके बाद सिसोदिया का यह बयान आया है।

सिसोदिया ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा सरकार ने दिल्ली की सड़कों से 61 लाख वाहनों को हटाने का अत्याचारी आदेश जारी किया है। यह शासन नहीं, यह ‘फुलेरा की पंचायत’ है। जिन परिवारों ने अपने वाहनों का ध्यान रखा है, उन्हें अब दंडित किया जा रहा है। यहां तक ​​कि जो वाहन 10,000 किलोमीटर से भी कम चले हैं, उन्हें भी अयोग्य माना जा रहा है।”

एक जुलाई से दिल्ली में 15 वर्ष से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 वर्ष से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों में ईंधन भरने पर रोक लगा दी गई है।

आदेश के मुताबिक, तय अवधि पार कर चुके चार पहिया वाहनों पर 10,000 रुपये और दो पहिया वाहनों पर 5,000 रुपये का जुर्माना शामिल है, साथ ही संभावित जब्ती और गाड़ी उठाकर ले जाने का शुल्क भी देना होगा।


सिसोदिया ने नीति के उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए पूछा, “इससे किसे फायदा होता है? वाहन निर्माताओं, कबाड़ कारोबारियों और नंबर प्लेट कंपनियों को। क्या यह संयोग है कि यह आदेश टैक्सी किराए में वृद्धि की अनुमति दिए जाने से ठीक पहले आया?”

उन्होंने भाजपा पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा, “ उन्होंने (भाजपा ने) रातोंरात अध्यादेश लाकर उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के आदेश की अवहेलना की। अब वे कहते हैं कि वे दिल्ली के 61 लाख परिवारों की मदद नहीं कर सकते।”

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