अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद हमास शांति के लिए इस कदर मजबूर हो गया है कि उसने इजरायल के सभी बंधकों को रिहा करने पर सहमति बना ली है। लेकिन दूसरी ओर हमेशा फिलीस्तीन को अपना समर्थन देने का दावा करने वाला पाकिस्तान अमेरिका और इस्मालिक देशों को खुश करने की फिराक में बुरी तरह फंस गया है।
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करने वाला पाकिस्तान उनके 20 सूत्रीय गाजा शांति प्रस्ताव से किनारा करता दिख रहा है। पाक के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को अपने देश को इससे अलग करते हुए कहा कि गाजा में इजरायल-हमास युद्ध को खत्म करने के लिए ट्रंप का 20-सूत्रीय प्रस्ताव मुस्लिम बहुल देशों के एक समूह के पेश किए गए मसौदे से मेल नहीं खाता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जिस प्रस्ताव का समर्थन किया था वह प्रस्ताव हमारा नहीं है।
गाजा पीस प्लान से पाकिस्तान ने झाड़ा पल्ला
इशाक डार का यह बयान पाकिस्तान की संसद में ऐसे समय पर आया है जब गाजा पीस प्लान प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क गया है। डार ने कहा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तुत 20-सूत्रीय प्रस्ताव की रूपरेखा उस मसौदे से मेल नहीं खाती है जो मुस्लिम देशों ने संयुक्त रूप से तैयार की थी। उन्होंने कहा, ‘मैंने साफ कर दिया है कि ये 20 प्वाइंट्स जिन्हें ट्रंप ने सार्वजनिक किया है, यह हमारा नहीं है। ये हमारे ड्राफ्ट से मेल नहीं खाते हैं। इसमें जो बदलाव किए गए हैं वो हमारी सहमति से नहीं हुए हैं।’
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डबल गेम खेलने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान की हमेशा से ही यही नियत रही है। वह अपने बयानों से कब मुकर जाए इसका कुछ कहा नहीं जा सकता। इससे पहले हफ्ते की शुरुआता में इशाक रडार ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि गाजा पीस प्लान अमेरिका की पहल है, पाकिस्तान की ओर से तैयार किया गया ड्राफ्ट नहीं है। जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का समर्थन यह दर्शाता है कि वह अमेरिका और मुस्लिम देशों को खुश करने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि वो डबल गेम खेलने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप के गाजा प्लान समर्थन से शहबाज से पाकिस्तानी हुए नाराज
दरअसल, शहबाज शरीफ ने ट्रंप के शांति प्रस्ताव वाले ट्वीट का समर्थन करते हुए ट्वीट किया था कि, ‘मेरा पूरा भरोसा है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बेहद अहम और तत्कालीन समझौते को हकीकत में बदलने के लिए हर संभव मदद करने को तैयार हैं।’ शहबाज के इसी ट्वीट पर पाकिस्तान की जनता ने कड़ी नाराजगी जताई। उनके इस कदम को पाकिस्तान की फिलिस्तीन पर लंबे समय से चली आ रही नीति से अलग माना गया। यही नहीं, सोशल मीडिया पर तो वह अमेरिका को खुश करने के चक्कर में पाकिस्तान की फिलिस्तीन नीति कमजोर करने और इजरायल को अपनाने तक के आरोप का शिकार हुए। आलोचकों ने तर्क दिया है कि यह प्रस्ताव फिलिस्तनीयों के नहीं बल्कि इजरायल के हित में है।
बताते चलें दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को लेकर जो शांति प्रस्ताव दिया है, उससे अरब देश खुश नहीं हैं। 30 सितंबर को मिस्र, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, इंडोनेशिया और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी कर ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन किया था। लेकिन हमास को सौंपे गए ड्राफ्ट में बदलाव कर दिए गए थे। हमास ने ड्राफ्ट की शर्तों में बदलाव की मांग की है। वहीं कतर ने भी इस प्रस्ताव के कई बिंदुओं पर नई चर्चा की बात कही। वहीं हमास की ओर अब तक ट्रंप के गाजा शांति प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में संभावना है कि वो इसे मानने से इनकार कर देगा।
