पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय द्वारा “लोकसंस्कृति और जनसंचार” विषय पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 16 मार्च से किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य लोकसंस्कृति और आधुनिक जनसंचार माध्यमों के अंतर्संबंधों पर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय ने संगोष्ठी का पोस्टर जारी करते हुए कहा कि लोकसंस्कृति और जनसंचार माध्यमों के बीच संबंधों पर होने वाले विविध व्याख्यान और शोध समाज तथा राष्ट्र को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोक परंपराओं के संरक्षण और समकालीन संदर्भों में उनके सशक्त प्रस्तुतीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनोज लोढा ने बताया कि दहमीकलां स्थित विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से विद्वान, शोधार्थी, मीडिया विशेषज्ञ तथा लोकसंस्कृति के अध्येता भाग लेंगे।

उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के प्रमुख विषयों में भारतीय लोकगीत और जनसंचार माध्यम, लोकनृत्य और दृश्य माध्यम, लोकसंस्कारों का मीडिया प्रतिनिधित्व, लोकदेवता और डिजिटल मंच, डिजिटल मीडिया एवं लोकसंस्कृति का अंतर्संबंध तथा लोक अध्ययन पर जनसंचार शोध जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

आयोजकों के अनुसार यह संगोष्ठी लोक परंपराओं और आधुनिक मीडिया के बीच संवाद स्थापित करने के साथ-साथ शोध और अकादमिक दृष्टिकोण को भी मजबूत करने का मंच प्रदान करेगी।

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