राजनीति में कोई अपना नहीं है और कोई पराया नहीं है। कोई छोटा नहीं है कोई बड़ा नहीं है। जो कल तक कमजोर थे आज ताकतवर हैं। जो खुद को कभी सरकार मानते थे, वो आज अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। तेजी से बदलते वक्त के साथ सियासत का रंग भी बदलता है। यहां किसी चीज का मोल हो या न हो रिश्तों का कोई मोल नहीं होता। कभी अपनी सरकार के खिलाफ हमलावर रहने वाले वरुण गांधी ने बीते दिनों सपरविरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। उन्हें पितृवत बताया है। सियासत में अटकलों पर ही जब इतनी संभावनाएं जताई जाने लगती हैं। ऐसे में अचानक से हुई इस मुलाकात के मायने निकाला जाना भी लाजिमी है। क्या वरुण गांधी बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी के लिए अब तैयार हो रहे हैं?

वरुण गांधी की मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी से आखिर क्यों हुई? क्या वरुण गांधी का सियासी वनवास खत्म होने वाला है? दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही मेल मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है।

वरुण ने मोदी से मुलाकात कर पिता समान बताया

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से बीजेपी के सांसद रहे वरुण गांधी ने सब परिवार प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। इस दौरान वरुण गांधी के साथ उनकी पत्नी और बेटी मौजूद रही। वरुण गांधी ने पीएम से आशीर्वाद लिया और मार्गदर्शन भी हासिल करने की बात कही। वरुण गांधी ने 17 मार्च को सोशल मीडिया पोस्ट पर पीएम मोदी के साथ मुलाकात की तस्वीर शेयर की है। तस्वीर में पीएम मोदी के साथ वरुण गांधी और उनकी पत्नी और बेटी भी दिखाई पड़ रही है। वरुण गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि परिवार सहित श्रद्धेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वरुण ने कहा कि आपके आभा मंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह है और संरक्षण का भाव है। आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है। आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।

इस मुलाकात को बंगाल चुनाव से क्यों जोड़कर देखा जा रहा है?

2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद वरुण गांधी की यह पहली मुलाकात होगी जो वह प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे। इसीलिए इस मुलाकात को लेकर खूब चर्चाएं हो रही है। रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ वरुण गांधी की सियासी मुलाकात को लेकर अटकलें तेज हैं। वरुण गांधी ने पीएम मोदी से यह मुलाकात ऐसे समय में की है जब पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है। चर्चा है कि पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में बीजेपी वरुण गांधी की उपयोगिता देख रही है, क्योंकि वह पूर्व में बंगाल के प्रभारी रह चुके हैं और उनकी पत्नी भी मूल रूप से बंगाली हैं। दबे स्वर में यह भी चर्चा है कि उनकी पत्नी यामिनी रॉय वहां से चुनाव लड़ सकती हैं।

बंगाल का प्रभारी बनाया जाएगा?

राजनीतिक गलियारे में चर्चा इस बात की है कि कहीं वरुण गांधी को पश्चिम बंगाल में कोई जिम्मेदारी तो नहीं मिलने वाली। क्योंकि इससे पहले भी वरुण गांधी को एक बार पश्चिम बंगाल का जिम्मा मिला हुआ था। तब साल था 2013 का। इसके साथ ही माना यह भी जा रहा है कि अगले साल उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में वरुण सक्रिय भूमिका अदा कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि वरुण गांधी को संगठन या राज्यसभा के जरिए कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।  बंगाल में बीजेपी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए उन्होंने उस समय के बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे राहुल सिन्हा के साथ काम किया था। बीजेपी ने राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजा है। अब वरुण गांधी की पीएम मोदी से मुलाकात बंगाल में उनके एक्टिव होने के संकेत के रूप में देखी जा रही।

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