अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस, नाटो और यूरोप की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान दिए गए भाषण और उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात में उन्होंने कई विवादित बयान दिए।
जेलेंस्की के साथ बैठक के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूसी युद्धक विमान नाटो देशों की हवाई सीमा का उल्लंघन करता है तो अमेरिका क्या भूमिका निभाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे विमानों को तुरंत मार गिराना चाहिए। हालांकि, जब सवाल किया गया कि क्या वॉशिंगटन हर हाल में नाटो का समर्थन करेगा, तो ट्रंप का जवाब था- “यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।”
ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। उनके शब्दों में, यह संघर्ष “बस एक छोटी-सी झड़प” होना चाहिए था, लेकिन यह लंबा खिंच गया, जिससे रूस की छवि भी प्रभावित हुई।
यूरोप पर सीधा हमला
अपने भाषण में ट्रंप ने यूरोप की ऊर्जा नीति पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कई नाटो देश अब भी रूस से गैस और तेल खरीद रहे हैं और इस तरह “खुद के खिलाफ जंग को फंड कर रहे हैं।” ट्रंप की चेतावनी थी कि अगर रूस ने शांति वार्ता का रुख नहीं अपनाया, तो अमेरिका बेहद सख्त टैरिफ लगाएगा। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कदम तभी प्रभावी होंगे जब यूरोप भी उसी नीति को अपनाए। उन्होंने दो टूक कहा, “यूरोप को आगे आना होगा।”
इमिग्रेशन पर आक्रामक रुख
प्रवासन के मुद्दे पर ट्रंप का लहजा और भी तीखा रहा। उन्होंने यूरोप की ओपन बॉर्डर पॉलिसी को “नाकाम प्रयोग” करार दिया और कहा कि यह व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। ट्रंप ने आंकड़े गिनाते हुए दावा किया कि जर्मनी की जेलों में लगभग 50% कैदी विदेशी हैं, ऑस्ट्रिया में यह संख्या 53%, ग्रीस में 54% और स्विट्जरलैंड में 72% है।
उन्होंने इसे यूरोप की “राजनीतिक शुद्धता” की असफलता बताया। लंदन के मेयर सादिक खान को निशाने पर लेते हुए ट्रंप ने उन्हें “भयानक मेयर” कहा और आरोप लगाया कि खान शरीयत कानून लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि खान ने कभी ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है।
अपने वक्तव्य के अंत में ट्रंप ने कहा कि अगर यूरोप ने अपनी प्रवासन और ऊर्जा नीतियों में सुधार नहीं किया, तो यह “पश्चिमी यूरोप की मौत” साबित हो सकता है।
