भारत-US ट्रेड डील को लेकर विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर तंज कस रहा है. एक बार फिर से कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारत-US ट्रेड डील के लिए घोषित फ्रेमवर्क की आलोचना की. उन्होंने लिखा कि कृषि उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी में कमी से अमेरिकी किसानों को उनके भारतीय समकक्षों की कीमत पर फायदा होगा, अभी जारी किया गया यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया जॉइंट स्टेटमेंट डिटेल्स पर चुप है लेकिन जो पता चला है उससे यह साफ है कि भारत अब रूस से तेल इंपोर्ट नहीं करेगा.
नहीं हुआ कोई फायदा
उन्होंने आगे लिखा कि US ने घोषणा की है कि अगर भारत रूस से सीधे या इनडायरेक्ट तरीके से तेल खरीदता है तो 25 परसेंट पेनल्टी फिर से लगाई जा सकती है. साथ ही पीएम का मजाक उड़ाते हुए लिखा कि फोटो-ऑप्स से भारत को ज्यादा फायदा नहीं हुआ, जिससे डिप्लोमेसी की विफलता का संकेत मिलता है. आगे कहा कि भारत भारतीय किसानों की कीमत पर अमेरिकी किसानों की मदद के लिए इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती करेगा. USA से भारत का सालाना इंपोर्ट तीन गुना हो जाएगा, जिससे हमारा लंबे समय से चला आ रहा गुड्स ट्रेड सरप्लस खत्म हो जाएगा.
दोस्त दोस्त ना रहा
आगे लिखा कि भारत के US को IT और दूसरी सर्विसेज के एक्सपोर्ट पर बहुत अनिश्चितता बनी रहेगी. US को भारत के सामान के एक्सपोर्ट पर पहले से ज्यादा ड्यूटी लगेगी. गले मिलने और फोटो खिंचवाने का कोई खास फायदा नहीं हुआ. साथ ही कहा कि दोस्त दोस्त ना रहा.
व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क की घोषणा
बता दें कि भारत और US ने व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क की घोषणा की. संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह ढांचा 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ता के लिए देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन होगा. संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भारतीय मूल के सामानों पर 18 प्रतिशत की पारस्परिक शुल्क दर लागू करेगा, जिसमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, कार्बनिक रसायन, घर की सजावट, कलात्मक उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं.
हट जाएगी टैरिफ
संयुक्त बयान में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान भागों पर शुल्क भी हटा देगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए लगाए गए थे. बयान के अनुसार, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त या कम कर देगा अगले पांच सालों में US एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स, कीमती मेटल्स, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल पर 500 बिलियन डॉलर खर्च होंगे.
