दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह उपेक्षित विरासत स्मारकों का संरक्षण करके व्यवसायों, संस्थानों व स्थानीय समुदायों की मदद से उन्हें सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित करेगी।

एक मंत्री ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में पुरातत्व विभाग द्वारा विरासत संरक्षण पर आयोजित एक सम्मेलन में यह टिप्पणी की।

एक बयान में कहा गया है कि चर्चा “एक विरासत स्थल को गोद लें” योजना पर केंद्रित थी, जिसका उद्देश्य स्मारकों को सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुविधाओं से सुसज्जित करना है।

पर्यटन और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली की कई ऐतिहासिक संरचनाओं का वर्षों से रखरखाव नहीं किया गया है, लेकिन सरकार उनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि लगभग 75 स्मारकों का जीर्णोद्धार पहले ही किया जा चुका है।

‘एक विरासत स्थल को गोद लें’ मॉडल में निजी और सामुदायिक हितधारकों को पांच साल की अवधि के लिए ‘स्मारक मित्र’ के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है।

इस योजना का उद्देश्य आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना, पर्यटन को बढ़ावा देना और कम प्रसिद्ध स्मारकों के आसपास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पहली बार कॉर्पोरेट समूहों के सहयोग से स्मारकों के संरक्षण का कार्य करने का निर्णय लिया है।

भूली भटियारी का महल, मालचा महल, बारादरी, दारा शिकोह पुस्तकालय, बाड़ा लाओ का गुंबद, गोल गुंबद, हस्तसाल मीनार, कोस मीनार, बवाना जेल, शहीद स्मारक और कुली खान का मकबरा को नया रूप देने के लिए का निर्णय लिया गया है।

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