दिल्ली की संकरी गलियों और कॉलोनियों तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने के लिए राजधानी में अब तक की सबसे छोटी 7 मीटर लंबी मिनी बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। यह नई बसें मौजूदा 9 मीटर लंबी DEVI इलेक्ट्रिक बसों से भी छोटी होंगी। दिल्ली सरकार ने लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने और मेट्रो स्टेशनों से फीडर सेवा बढ़ाने के उद्देश्य से इन 500 मिनी इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की मंजूरी दी है।

सरकार का निर्णय और टेंडर प्रक्रिया

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन बसों के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। दिल्ली सरकार यह कदम पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत उठा रही है। फेज-2 के तहत कुल 3,330 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह कॉम्पैक्ट बसें मुख्य मार्गों के साथ-साथ संकरी गलियों और अंदरूनी इलाकों में संचालन के लिए उपयुक्त होंगी।

सड़कों पर जल्द दिखेंगी नई बसें

परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि बसों की पहली खेप जल्द ही राजधानी की सड़कों पर दिखाई देगी। इन बसों की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से की जाएगी ताकि मौजूदा मार्गों का पुनर्गठन सुचारू रूप से हो सके। इस पहल से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यात्री सुविधा बढ़ेगी और मेट्रो स्टेशनों तक फीडर कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

पूरी तरह इलेक्ट्रिक

नई बसों की खरीद का जिम्मा केंद्रीय एजेंसी CESL (कंपनी फॉर ईलेक्ट्रिफिकेशन ऑफ पब्लिक ट्रांसपोर्ट) संभाल रही है। इस योजना के तहत कुल 3,330 बसें शामिल हैं, जिनमें 500 मिनी 7 मीटर लंबी बसें, 2,330 नौ मीटर लंबी बसें और 500 बारह मीटर लंबी बसें शामिल हैं। सभी बसें लो-फ्लोर, वातानुकूलित और पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी।

छोटी आकार की होने के बावजूद ये बसें मौजूदा 9 मीटर लंबी DEVI बसों जैसी सुविधाओं से लैस होंगी, जैसे लो-फ्लोर एंट्री, एयर कंडीशनिंग, सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और रियल-टाइम यात्री सूचना प्रणाली। लो-फ्लोर डिजाइन विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बेहद लाभकारी होगा।

वर्तमान में दिल्ली में कुल 5,336 सरकारी बसें चल रही हैं, जिनमें से 4,000 से अधिक इलेक्ट्रिक हैं। इनमें 1,200 से अधिक 9 मीटर लंबी DEVI बसें, करीब 2,000 बारह मीटर बसें और 100 मेट्रो फीडर बसें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मार्च तक 5,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर होंगी और 2028 तक राजधानी में कुल बसों का बेड़ा बढ़कर 13,760 तक पहुँच जाएगा।

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