देशभर में दिवाली की चमक-धमक का माहौल बना हुआ है। हर तरफ रोशनी, मिठाइयों और सजावट से त्योहार की खुशियाँ मनाई जा रही हैं। बॉलीवुड से लेकर पंजाबी संगीत जगत तक के कई सितारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने फैंस को दिवाली की शुभकामनाएं दी हैं। इस बीच पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी अपने दिल की बात साझा की, जो उनके फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

दिवाली क्यों नहीं मनाते दिलजीत?
दिलजीत के आधिकारिक फैन पेज ‘टीम दिलजीत ग्लोबल’ पर हाल ही में एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि दिवाली उनके लिए बचपन का सबसे प्यारा त्योहार था। दिलजीत ने कहा कि जब वे छोटे थे, तो दिवाली का जश्न पूरे माहौल को रोशन कर देता था। वे महीने पहले से ही इस त्योहार की तैयारियों में जुट जाते थे। उनका गांव, घर और आसपास की गलियां रंग-बिरंगी रोशनी और दीयों से जगमगाती थीं। शाम होते ही पटाखों की आवाज से माहौल गूंज उठता था। दिलजीत ने यह भी साझा किया कि वे अपनी दिवाली की शाम अपने गांव दोसांझ कलां के गुरुद्वारे, मंदिर, दरगाह और गुगा पीर के मंदिरों में जाकर दीप जलाते थे, जो त्योहार की आध्यात्मिकता को और गहरा करता था। दूसरे वीडियो में दिलजीत ने भावुक होकर बताया कि जब वे परिवार के साथ रहते थे, तब दिवाली का दिन उनके लिए सबसे खास और रोशन होता था। लेकिन अब परिवार से दूर होने के बाद उनका त्योहार मनाने का उत्साह कम हो गया है। उन्होंने कहा, “अब दिवाली मनाने का मन नहीं करता। एक तरह का खालीपन सा महसूस होता है। जो आनंद पहले मिलता था, वो अब नहीं है। अब तो पटाखों की आवाज से भी डर लगने लगता है।”

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दिलजीत के आगामी प्रोजेक्ट्स
जहां दिलजीत की इस भावुक कहानी ने उनके फैंस को भावुक कर दिया, वहीं उनके प्रोफेशनल लाइफ में वे काफी सक्रिय हैं। वे जल्द ही ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 17वें सीजन में अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर नजर आने वाले हैं। इसके अलावा उनकी फिल्म ‘बॉर्डर 2’ भी जल्द ही रिलीज होने वाली है, जिसमें वे एक एयरफोर्स पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म दर्शकों के बीच काफी चर्चा में है और दिलजीत की फैन फॉलोइंग इस प्रोजेक्ट का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

फैंस का प्यार 
दिलजीत की इस इमोशनल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस ने उनके जज्बातों को समझते हुए कई heartfelt प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने अपनी भी दिवाली से जुड़ी यादें साझा कीं और लिखा कि परिवार से दूर होने पर त्योहारों की खुशियाँ वाकई फीकी पड़ जाती हैं। इस बातचीत ने सभी को यह एहसास दिलाया कि त्योहारों की असली खुशी रंगीन रोशनी या पटाखों की आवाज़ों में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए समय में निहित होती है।

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