राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल तथा उपराज्यपालों की नई नियुक्तियों की घोषणा की। इस फैसले को व्यापक प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस बदलाव के तहत पश्चिम बंगाल, तमिल नाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना, नागालैंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और लद्दाख सहित कई स्थानों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सबसे प्रमुख बदलाव तमिल नाडु के राज्यपाल आरएन रवि के स्थानांतरण के रूप में सामने आया है। उन्हें अब पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे, जिन्होंने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बोस पिछले साढ़े तीन वर्ष से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे और उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा।

तमिल नाडु में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर को वहां का नया राज्यपाल बनाया गया है। इससे पहले वह केरल में राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे। चुनावी माहौल को देखते हुए इस नियुक्ति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

दिल्ली और लद्दाख में भी अहम बदलाव हुए हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। संधू लंबे समय तक कूटनीतिक सेवा में रहे हैं और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

 

तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी राज्यपाल बदले गए हैं। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अब तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं तेलंगाना के राज्यपाल रहे जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नागालैंड के नए राज्यपाल के रूप में बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को जिम्मेदारी दी गई है। बिहार में भी नई नियुक्ति की गई है। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। सेना में लंबे अनुभव वाले हसनैन सुरक्षा और रणनीति के मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने आरिफ मोहम्मद खान की जगह ली है।

 

इस फेरबदल में हिमाचल प्रदेश के लिए भी नई नियुक्ति की गई है। लद्दाख के उपराज्यपाल रहे कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। कविंदर गुप्ता ने गुरुवार को लद्दाख के उपराज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल हालांकि काफी चर्चा में रहा। हम आपको याद दिला दें कि कविंदर गुप्ता को जुलाई 2025 में लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह शहर में हिंसक घटना हुई थी। उस दिन क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया था। हालात बिगड़ने पर पुलिस की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें करगिल युद्ध का एक पूर्व सैनिक भी शामिल था। इस घटना ने देश भर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था।

 

तमिल नाडु में आर एन रवि और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार के बीच संबंध भी काफी तनावपूर्ण रहे। सत्तारुढ़ डीएमके ने कई बार आरोप लगाया कि राज्यपाल निर्वाचित सरकार के समानांतर राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं। राज्यपाल रवि ने कई विधेयकों को मंजूरी देने में देर की थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और दस विधेयकों को प्रभावी रूप से स्वीकृत मान लिया गया।

 

राज्यपाल रवि कई बार विधानसभा में सरकार के तैयार भाषण को पढ़े बिना ही बाहर चले गए या फिर अपने विचारों के अनुसार भाषण में बदलाव किया। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि निर्णय उन पर होता तो वे नीट से छूट देने वाले विधेयक को कभी मंजूरी नहीं देते। इन घटनाओं के कारण राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही।

 

आरएन रवि का प्रशासनिक और सुरक्षा क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। वह भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं और खुफिया ब्यूरो में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2014 से 2021 के बीच वे नागा शांति वार्ता के लिए केंद्र सरकार के वार्ताकार भी रहे थे। उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फोन कर आरएन रवि की नियुक्ति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से वे चकित और चिंतित हैं।

 

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार से इस बारे में पहले कोई परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थापित परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक हितों के कारण यह कदम उठाया गया हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह संविधान की भावना और देश की संघीय संरचना के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।

 

बहरहाल, मोदी सरकार जल्द ही अपने तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने वाली है। ऐसे में माना जा रहा है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों और बदलावों का दौर शुरू हो चुका है। देखना होगा कि आने वाले समय में मोदी मंत्रिमंडल में क्या फेरबदल होते हैं या अन्य महत्वपूर्ण पदों पर क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights