आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक महिला ने सहरसा जाने वाली ट्रेन के डिब्बे में बच्ची को जन्म दिया। यह घटना उस समय हुई जब महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और ट्रेन रास्ते में थी। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के कर्मचारियों ने तत्परता से कार्रवाई की और ट्रेन में मौजूद यात्रियों की मदद से महिला की डिलीवरी कराई। बाद में, महिला और नवजात को अस्पताल भेजा गया, जहां दोनों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि उन्हें आनंद विहार से सहरसा जाने वाली ट्रेन में एक महिला के प्रसव पीड़ा से संबंधित सूचना मिली। महिला सब-इंस्पेक्टर नवीन कुमारी और उनकी टीम ने तुरंत उस स्थान पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। ट्रेन में मौजूद अन्य महिलाओं की मदद से महिला की डिलीवरी कराई गई। डिलीवरी के बाद महिला और नवजात को एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भेजा गया, जहां दोनों को मेडिकल देखभाल दी गई और उनकी स्थिति स्वस्थ पाई गई।

प्लेटफार्म नंबर सात पर एक महिला की डिलीवरी होने वाली है
आरपीएफ महिला सब-इंस्पेक्टर नवीन कुमारी ने बताया कि उन्हें सूचना मिलने के बाद वह तुरंत ड्यूटी पर मौजूद थीं और मौके पर पहुंचीं। एक यात्री ने उन्हें बताया कि प्लेटफार्म नंबर सात पर एक महिला की डिलीवरी होने वाली है। इसके बाद, नवीन कुमारी ने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया। यह घटना रात के सवा 11 बजे की है। वे अपनी महिला कांस्टेबल के साथ डी-9 कोच में पहुंचीं। कोच में, समस्तीपुर (बिहार) की एक महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी और वह फर्श पर लेटी हुई थी। आरपीएफ महिला कर्मियों ने यात्री और कोच में मौजूद अन्य महिलाओं की मदद से डिलीवरी कराई। इस दौरान, कोच में किसी डॉक्टर की उपस्थिति नहीं थी। हालांकि, पुलिस कर्मियों और यात्रियों की तत्परता से महिला की डिलीवरी सुरक्षित रूप से हुई।

डिलीवरी के बाद अस्पताल में भेजा गया महिला और नवजात 
डिलीवरी के बाद, महिला और नवजात को एंबुलेंस के द्वारा नजदीकी अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में दोनों की जांच की गई, और डॉक्टरों ने बताया कि महिला और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। महिला का स्वास्थ्य स्थिर है और नवजात बच्ची भी पूरी तरह से स्वस्थ है। इस पूरे घटनाक्रम में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और यात्रियों की मदद ने एक जीवन रक्षक भूमिका निभाई।

पवन एक्सप्रेस के शौचालय में एक बच्ची को दिया जन्म 
यह पहली बार नहीं है जब ट्रेन में डिलीवरी का मामला सामने आया हो। इससे पहले, जून 2024 में एक महिला ने ठाणे के पास चल रही पवन एक्सप्रेस के शौचालय में एक बच्ची को जन्म दिया था। उस वक्त भी महिला को प्रसव पीड़ा हो रही थी, लेकिन ट्रेन में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। हालांकि, महिला का स्वास्थ्य ठीक था, और वह अपने परिवार के साथ यात्रा कर रही थी।

समाज में एकजुटता और मदद का महत्व 
इस घटना ने रेलवे सुरक्षा और यात्री सहायता की अहमियत को उजागर किया है। आरपीएफ और अन्य रेलवे कर्मियों की तत्परता और यात्रियों के सहयोग से एक बड़ी संकट की घड़ी में महिला और नवजात की मदद की गई। यह घटना समाज में एकजुटता और मदद के महत्व को भी दर्शाती है।

 

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