अमेरिका ने अपने नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय हथियार सौदे में पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missiles) देने की मंजूरी दी है। यह सौदा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (DoD) द्वारा जारी किए गए एक बड़े बहुराष्ट्रीय अनुबंध का हिस्सा है, जिसमें कई नाटो और गैर-नाटो देशों को अत्याधुनिक मिसाइलें बेची जाएंगी।

ये देश सूची में शामिल
इस सूची में ब्रिटेन, पोलैंड, पाकिस्तान, जर्मनी, फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, रोमानिया, कतर, ओमान, दक्षिण कोरिया, ग्रीस, स्विट्जरलैंड, पुर्तगाल, सिंगापुर, नीदरलैंड, चेक गणराज्य, जापान, स्लोवाकिया, डेनमार्क, कनाडा, बेल्जियम, बहरीन, सऊदी अरब, इटली, नॉर्वे, स्पेन, कुवैत, स्वीडन, ताइवान, लिथुआनिया, इज़राइल, बुल्गारिया, हंगरी और तुर्की जैसे देश शामिल हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पाकिस्तान को कितनी मिसाइलें दी जाएंगी या उनकी डिलीवरी की समय-सीमा क्या होगी।

बालाकोट स्ट्राइक में हुई थी AIM-120 की तैनाती
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने 2019 में भारत की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारतीय वायुसेना से हुई हवाई झड़प के दौरान AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। उस समय पाकिस्तान ने अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमानों से इन मिसाइलों को दागा था। ये मिसाइलें मीडियम रेंज (50–100 किमी तक) में हवाई लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम हैं और इन्हें अमेरिकी कंपनी रेथियॉन (Raytheon) द्वारा निर्मित किया जाता है। इनका इस्तेमाल अमेरिका के साथ-साथ नाटो देशों की वायु सेनाएं भी करती हैं।

इस डील के मायने 
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पाकिस्तान की वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ा सकता है। हालांकि, अमेरिका और पाकिस्तान के रक्षा संबंध हाल के वर्षों में सीमित हो गए हैं, फिर भी यह सौदा रणनीतिक सहयोग की पुनर्बहाली का संकेत दे सकता है।रत की ओर से इस डील पर चिंता जताए जाने की संभावना है, क्योंकि बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारत ने अमेरिका से पाकिस्तान को F-16 और उससे जुड़ी मिसाइलों के इस्तेमाल पर सख्त आपत्ति जताई थी।

 
अमेरिका-पाकिस्तान हथियार सौदा दक्षिण एशिया की सुरक्षा संतुलन (Security Balance) को प्रभावित कर सकता है। जहां एक ओर पाकिस्तान इसे अपनी सैन्य शक्ति के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं भारत के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।

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