ज्ञानवापी मस्जिद विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मुद्दा है सील वजूखाने के जीर्ण-शीर्ण हो चुके कपड़े को बदलने का। शुक्रवार को जिला जज संजय शुक्ला की अदालत में इस याचिका पर करीब दो घंटे तक बहस चली। अंततः कोर्ट ने सभी पक्षों और जिला प्रशासन को 29 अक्टूबर सुबह 9 बजे पेश होने का निर्देश दिया है।

हिंदू पक्ष सहमत, मुस्लिम पक्ष ने किया विरोध
हिंदू पक्ष ने अदालत में दलील दी कि वजूखाने को ढकने वाला कपड़ा पुराना और फटा हुआ है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए इसे बदलने की अनुमति दी जानी चाहिए। जिला प्रशासन की ओर से भी अदालत में कपड़ा बदलने को लेकर सहमति जताई गई। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि जब वजूखाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील किया गया था, तो उसका कोई भी परिवर्तन जिला जज की अदालत से नहीं हो सकता।

कोर्ट ने कहा- “निर्णय जिला प्रशासन ले”
मुस्लिम पक्ष के वकील अक़लाख अहमद ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने वजूखाने की देखरेख का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया है, इसलिए किसी बदलाव का आदेश वही दे सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रशासन को देखरेख की जिम्मेदारी दे चुका है, तो वही इस पर निर्णय ले। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 29 अक्टूबर को सभी पक्षकार और जिला प्रशासन उपस्थित रहेंगे, ताकि प्रशासन को निर्णय लेने के लिए आवश्यक कानूनी मार्गदर्शन मिल सके।

क्या है सील वजूखाना?
ज्ञानवापी मस्जिद का वजूखाना वह स्थान है, जिसे मई 2022 में कोर्ट के आदेश पर सील किया गया था। यह कार्रवाई तब हुई जब सर्वेक्षण के दौरान वहां “शिवलिंग जैसी आकृति” मिलने का दावा किया गया था।हिंदू पक्ष इसे शिवलिंग मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह सिर्फ फव्वारा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस क्षेत्र को संरक्षित और सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।

क्यों उठी कपड़ा और सील बदलने की मांग?
हाल के दिनों में यह रिपोर्ट सामने आई कि वजूखाने के कपड़े और सील खराब हो चुके हैं। इससे वहां की सुरक्षा और संरक्षा पर सवाल उठे। इसी कारण हिंदू पक्ष ने अदालत में याचिका दायर की कि कपड़ा और सील बदली जाए, ताकि सील क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित बना रहे।

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