समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने सोमवार को दिल्ली से रामपुर लौटते ही पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी के ‘स्लो पॉइजन’ वाले दावे पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि जेल में उन्हें या उनके बेटे अब्दुल्ला को धीमा जहर नहीं दिया गया। मुख्तार अंसारी की जेल में मौत की खबर से वे सतर्क जरूर हो गए थे, लेकिन यह केवल सावधानी थी, न कि कोई साजिश। खान ने जोर देकर कहा, ‘शाहिद सिद्दीकी अच्छे नेता हैं, लेकिन उन्हें कुछ गलतफहमी हो गई। शायद समझने में चूक हुई। मैंने अपने बारे में ऐसा कभी नहीं कहा।’

मुख्तार अंसारी की मौत ने किया अलर्ट

आजम खान ने बताया कि जब मार्च 2025 में मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में हृदयाघात से मौत हुई, तो चर्चा चली कि कहीं उन्हें स्लो पॉइजन तो नहीं दिया गया। इस खबर का उन पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने कहा, ‘मैं खाने-पीने की चीजों को लेकर और सतर्क हो गया था, ताकि मेरे साथ कोई ऐसी घटना न हो। लेकिन जेल में मुझे स्लो पॉइजन देने वाली बात उस तरह नहीं थी। यह केवल समझने और समझाने का फर्क है।’

खान ने अपनी जेल यात्रा के दौरान की कठिनाइयों का जिक्र किया। 23 महीने की सजा के बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा होने वाले खान ने बताया कि छोटी-सी कोठरी में रहने से उनकी सेहत बिगड़ गई। ‘दोपहर में एक पतली रोटी खाता था, रात में आधी-पौन रोटी। वक्त गुजारने के लिए नींबू का अचार बना लेता था। उसी आचार से रोटी खा लेता।’ उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता सेहत सुधारने की है। ‘उस बुरे दौर को कभी भूल नहीं सकता। सेहत दुरुस्त होने के बाद नए जोश के साथ लौटूंगा। अब ध्यान जनता और युवाओं की समस्याओं पर रहेगा।’

शाहिद सिद्दीकी का दावा-

विवाद की शुरुआत शनिवार को हुई जब शाहिद सिद्दीकी ने फेसबुक पर आजम खान से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में मुलाकात की तस्वीर शेयर की। पोस्ट में सिद्दीकी ने लिखा, ‘आजम ने बताया कि जेल में उन्हें और बेटे अब्दुल्ला को जहर देने की कोशिश की गई। खाने में स्लो पॉइजन दिया जा रहा था। शक होने पर उन्होंने जेल का खाना बंद कर खुद हाथों से बनाना शुरू कर दिया। उनका मानना है कि उन्हें मुख्तार अंसारी की तरह मारने की साजिश रची गई।’

सिद्दीकी ने मीडिया से बातचीत में भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि सीतापुर जेल में तन्हाई बैरक इतनी छोटी थी कि चलना मुश्किल था। पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। X पर भी कई पोस्ट्स में यह दावा वायरल हुआ, जहां यूजर्स ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया।

‘बड़े लोग आएंगे तो अच्छा लगेगा’

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 8 अक्टूबर को रामपुर आने की खबर पर आजम खान ने हल्का तंज कसा। ‘हमें तो अखबारों से पता चला। हम छोटी-सी गली में रहते हैं, जहां पानी भर जाता है। बड़े लोग आएंगे तो अच्छा लगेगा। हर बड़े आदमी का स्वागत है।’

रामपुर पहुंचने के बाद खान ने घर पर थोड़ा आराम किया और दोपहर करीब दो बजे जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां वे करीब पांच घंटे रहे, लेकिन मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी रही। शाम को वे बिना बयान दिए घर रवाना हो गए। X पर उनके इंटरव्यू की चर्चा जोरों पर है।

104 केस, 23 महीने की कैद

आजम खान पर कुल 104 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई अभी लंबित हैं। 20 सितंबर को रामपुर कोर्ट ने कुछ धाराएं खारिज कीं, जिससे रिहाई का रास्ता साफ हुआ। रिहाई के दिन उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला जेल पहुंचे। 100 गाड़ियों के काफिले के साथ वे रामपुर लौटे। रिहाई के बाद दिल्ली में इलाज कराया, जहां से सोमवार को घर आए।

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