मुजफ्फरनगर। समलैंगिक विवाह का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। राजपूत महासभा के पदाधिकारियों ने समलैंगिक विवाह के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। समलैंगिक विवाह की गेंद इस वक्त सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। क्योंकि केंद्र सरकार ने इस पर संसद में कानून बनाने से इंकार कर दिया है। कुछ राज्य इसके पक्षधर हैं। मुस्लिम विद्वानों के संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी इस कानून का विरोध किया। इस मामले की अपील कुछ राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। इसके बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। समय-समय पर समलैंगिक विवाह कानून का विरोध भी सामने आ रहा है।

बता दे कि कुछ दिन पूर्व ही मुजफ्फरनगर के वैश्य समाज की दर्जनों महिलाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को सौंपा था। जिसमें उन्होंने मांग की थी कि समलैंगिक विवाह कानून हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और यह आने वाली नस्लों को बर्बाद कर देगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा था कि इस विवाह को मान्यता ना दी जाए।

जनपद में कचहरी परिसर स्थिति जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे राजपूत महासभा के जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचकर फोन है ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को सौंपा। राजपूत महासभा के जिलाध्यक्ष ठाकुर राजेंद्र सिंह पुंडीर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून हमारी संस्कृति पर कुठाराघात है और इससे समाज में कुरीतियां पैदा होगी उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इसे कानूनी मान्यता न दी जाए।

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