जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सोमवार (02 मार्च) तड़के रिक्टर स्केल पर 2.2 की तीव्रता का हल्का भूकंप महसूस किया गया. हालांकि, अभी तक किसी के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भूकंप का झटका सुबह 01:02 बजे (भारतीय समयानुसार) आया. इसका केंद्र 32.95° उत्तरी अक्षांश और 76.06° पूर्वी देशांतर पर 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था.

इससे पहले 19 जनवरी को भी रिक्टर स्केल पर 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र लद्दाख क्षेत्र के लेह इलाके में था और इसके झटके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग तीव्रता से महसूस किए गए.

19 जनवरी को आया था 5.7 तीव्रता का भूकंप

स्थानीय मौसम विभाग के निदेशक मुख्तार अहमद ने मीडिया को बताया था कि सुबह 11:51 बजे रिक्टर स्केल पर 5.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र लद्दाख क्षेत्र के लेह इलाके में था. भूकंप का निर्देशांक 36.71 उत्तरी अक्षांश और 74.32 पूर्वी देशांतर था. यह पृथ्वी की सतह से 171 किलोमीटर अंदर आया. 19 जनवरी को आए भूकंप के झटके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग तीव्रता से महसूस किए गए. किसी भी क्षेत्र से किसी भी प्रकार की जानमाल की क्षति की कोई खबर नहीं मिली थी.

लद्दाख और घाटी के कुछ हिस्से भूकंप को लेकर संवेदनशील

लद्दाख क्षेत्र और घाटी के कुछ हिस्से भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित हैं. बता दें कि वर्ष 2005 में 8 अक्टूबर को सुबह 8:50 बजे रिक्टर स्केल पर 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद शहर में था. इस भूकंप ने मुजफ्फराबाद शहर को पूरी तरह से तबाह कर दिया, साथ ही खैबर पख्तूनख्वा के पास स्थित बालाकोट और जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों को भी प्रभावित किया था. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 थी और मरकली स्केल पर अधिकतम तीव्रता 11 (अत्यधिक) थी.

वर्ष 2005 में आए भूकंप के झटके अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान और शिनजियांग क्षेत्र में भी महसूस किए गए थे. हालांकि तीव्रता के लिहाज से यह इस क्षेत्र में आया सबसे बड़ा भूकंप नहीं था, लेकिन इसे सबसे घातक माना जाता है, जो 1935 के क्वेटा भूकंप से भी कहीं अधिक घातक है. यह दशक की पांचवीं सबसे घातक प्राकृतिक आपदा थी.

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