देवबंद के मेवात में पहले दिन से दंगा पीड़ितों की मदद करने वाली संस्था जमीअत उलमा-ए-हिंद के संवैधानिक प्रयासों से अब तक 159 निर्दोष लोगों को जमानत मिल चुकी है। जमीअत के सामने राहत और पुनर्वास के अलावा एक बड़ा कार्य उन लोगों को भी रिहा कराना है। जिन्हें पुलिस ने बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया है। मेवात के गांवों के रहने वाले लोग जिन्होंने आज तक अदालत की शक्ल भी नहीं देखी, उनके परिजनों के लिए यह सबसे कठिन समय है।
जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर में नूंह के जाने-माने वकील ताहिर हुसैन रोपड़िया के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम इन निर्दोष लोगों को हर संभव कानूनी सहायता प्रदान कर रही है। जमीअत उलमा-ए-हिंद 208 लोगों के केस न्यायालय में लड़ रही है। अदालत ने इन मुकदमों के आधार को कमजोर बताते हुए आरंभिक चरण में ही जमानत दे दी।
मोहम्मद ताहिर हुसैन रोपड़िया ने बताया कि यह सभी गिरफ्तारी नूंह में हुई हिंसा के संदर्भ में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाते हुए की गई हैं। जबकि वह लोग जिन्होंने 14 मस्जिदों को क्षति पहुंचाई। गुरुग्राम और मेवात के तावडू में दुकानों, खोखे और ठेलों को जलाकर राख कर दिया। वह खुलेआम घूम रहे हैं। ताहिर रोपड़िया ने न्यायालय में जज के सामने पुरजोर दलील दी कि पुलिस अपने स्थानीय जासूसों की सलाह मान रही है। उसे सबूतों से कोई सरोकार नहीं है। हालांकि यह सभी लोग गरीब, जरूरतमंद और ग्रामीण हैं। हमारे प्रयासों से कुछ हफ्तों में ही इतनी जमानतें मंजूर होना खुशी की बात है।
इस अवसर पर कानूनी उपायों की समीक्षा करने के बाद जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि निर्दोषों को न्याय मिलने से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बहाल होता है, जो आज के दौर में बहुत महत्वपूर्ण है। मौलाना मदनी ने कहा कि वर्तमान समय में कानून प्रवर्तन एजेंसियां अपना दायित्व ठीक तरह से नहीं निभा रही हैं। इसका कारण यह है कि उच्च अधिकारियों को जवाबदेह नहीं बनाया जाए।
