साइंस की दुनिया में एक नई खोज ने लोगों की कल्पनाओं को फिर से जगा दिया है। अकसर यह सवाल मन में उठता रहा है कि क्या इंसान को मौत के बाद फ्रीज करके भविष्य में फिर से जिंदा किया जा सकता है। हाल ही में जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है।

दिमाग को ठंडा कर फिर किया गर्म
वैज्ञानिकों ने चूहों के दिमाग के ऊतकों पर एक खास प्रयोग किया। उन्होंने ब्रेन टिश्यू को बेहद कम तापमान, करीब -196 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया और फिर उसे दोबारा गर्म करके सक्रिय करने में सफलता हासिल की। यह तापमान लिक्विड नाइट्रोजन के जरिए हासिल किया गया, जो आमतौर पर वैज्ञानिक प्रयोगों में इस्तेमाल होता है।

इस प्रयोग की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब किसी जीवित कोशिका को जमाया जाता है तो उसके अंदर बर्फ के क्रिस्टल बन जाते हैं, जो कोशिका को नुकसान पहुंचा देते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने विट्रीफिकेशन तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में एक खास तरह का केमिकल, जिसे क्रायोप्रोटेक्टेंट कहा जाता है, उपयोग किया गया। यह केमिकल कोशिकाओं के अंदर बर्फ बनने से रोकता है और उन्हें कांच जैसी स्थिर अवस्था में बदल देता है।

जब इन जमे हुए ब्रेन टिश्यू को दोबारा सामान्य तापमान पर लाया गया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग के ऊतक सिर्फ सुरक्षित ही नहीं रहे, बल्कि उनमें फिर से गतिविधि शुरू हो गई। न्यूरॉन्स ने इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजना शुरू कर दिया और उनके बीच आपसी संचार भी बहाल हो गया। यहां तक कि याददाश्त से जुड़ी प्रक्रिया भी सक्रिय देखी गई।

क्या अब इंसानों को भी फ्रीज करके बाद में जिंदा किया जा सकता
हालांकि इस उपलब्धि को लेकर कुछ लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या अब इंसानों को भी फ्रीज करके बाद में जिंदा किया जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस पर साफ तौर पर कहा है कि यह प्रयोग सिर्फ छोटे ब्रेन टिश्यू तक सीमित है। अभी पूरे दिमाग या किसी जीवित प्राणी पर ऐसा करना संभव नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस शोध का सबसे बड़ा फायदा Medical field में होगा। इससे भविष्य में अंगों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे organ transplant आसान हो सकता है। इसके अलावा, दिमाग से जुड़ी बीमारियों पर रिसर्च करने के लिए भी यह तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है।

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