मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 14 बच्चों की हुई मौत के बाद प्रशासन जागा है। पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए ‘कोल्ड्रिफ’ लिखने वाले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही सिरप बनाने वाली तमिलनाडु की फार्मा कंपनी  sresun फार्मासूटिकल के संचालकों पर केस दर्ज हुआ है। MP सरकार ने छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर बैन भी लगा दिया है। अधिकारियों ने कहा कि दवा के सैंपल में जहरीला पदार्थ मिला है।

कफ सिरप लिखने वाले डॉक्टर की गिरफ्तारी

छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र राजपाल चौक से डॉक्टर प्रवीण सोनी को शनिवार (4 अक्टूबर) देर रात एसपी की स्पेशल टीम ने अरेस्ट किया है। छिंदवाड़ा SP अजय पांडेय ने बताया कि परासिया BMO डॉक्टर अंकित सहलाम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। कफ सिरप बनाने वाली कंपनी ‘श्रीसन फार्मास्युटिकल्स’ पर भी केस दर्ज हुआ है। मामले में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट की धारा 27(ए) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 और 276 के तहत FIR हुई है।

बता दें कि डॉक्टर सोनी परासिया एक जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ हैं। वो वैसे तो सरकारी डॉक्टर हैं, लेकिन उनका प्राइवेट क्लीनिक भी है। उन्होंने क्लीनिक पर आने वाले बच्चों की दवाइयों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखी थी। जानकारी के अनुसार कफ सिरप लेने के  कुछ दिन बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।  बच्चों में बुखार, उल्टी और पेशाब बंद होने जैसे लक्षण दिखे।

रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा

मामले में एक जांच रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें खुलासा हुआ कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा 48.6% थी, जो महज 0.1 प्रतिशत होना चाहिए।

CM यादव ने कहा- दोषियों को बख्शेंगे नहीं

बता दें कि यह कफ सिरप कांचीपुरम की एक फैक्ट्री में बनाया जा रहा था। मध्य प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर बैन लगा दिया है। वहीं, घटना के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार से भी जांच कराने की मांग की है। CM मोहन यादव ने बताया कि मामले की जांच के लिए राज्य स्तर पर एक टीम भी गठित हुई है। इस मामले में जो कोई भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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