भारत का अगला बड़ा मिशन चंद्रयान-4 चांद के साउथ पोल के पास पहाड़ी इलाके में उतर सकता है. वैज्ञानिकों ने यह जानकारी चंद्रयान के ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई हाई-क्वालिटी तस्वीरों की जांच करने के बाद की है. ISRO के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जगह लैंडिंग के लिए न केवल सुरक्षित है बल्कि वैज्ञानिक खोज के लिए बहुत जरूरी भी है. इस जगह को चुनने के लिए चंद्रमा की जमीन का बहुत गहराई से विश्लेषण किया गया है. इसकी जानकारी साल 2026 में एक बड़े वैज्ञानिक सम्मेलन LPSC में साझा की गई.

क्या है चंद्रयान-4?
चंद्रयान-4 भारत का बहुत ही खास मिशन है जिसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंड होकर वहां से मिट्टी और पत्थरों के बड़े सैंपल कलेक्ट करना और वापस धरती पर लेकर आना. 2023 में चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद यह ISRO का अगला बड़ा और मुश्किल कदम है. इस मिशन के लिए सही जगह चुनना बहुत जरूरी है क्योंकि इस बार अंतरिक्ष यान को सिर्फ उतरना नहीं बल्कि कई काम करने हैं.

कैसे हुई सही जगह की खोज?
लैंडिंग के लिए सही जगह चुनने के लिए वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-4 के कैमरे से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया. यह कैमरा इतना ताकतवर है कि चंद्रमा की सतह की बहुत साफ और बारीक तस्वीरें खींच सकता है. यह कैमरा चंद्रमा की जमीन पर मौजूद हर छोटी से छोटी चीज को भी साफ देख सकता है.

कहां उतरेगा चंद्रयान-4?
वैज्ञानिकों ने लैंडिंग के लिए 4 जगहों की जांच की है जिसमें MM-4 नाम की जगह सबसे सुरक्षित पाई गई है. यह जगह चंद्रमा के मॉन्स माउटन नाम के पहाड़ी इलाके के पास है. यहां की जमीन काफी हद तक बराबर है जिससे लैंडर के पलटने का खतरा नहीं रहेगा. यहां दूसरे इलाकों के मुकाबले कम बड़े पत्थर और कम गहरे गड्ढे हैं और यहां सूरज की रोशनी अच्छी रहती है.

ISRO ने इसी जगह को क्यों चुना?
यह इलाका उन गड्ढों के पास है जहां हमेशा अंधेरा रहता है और वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां बर्फ के रूप में पानी मिल सकता है. यहां से लाए गए मिट्टी और पत्थरों के सैंपल से यह समझने में मदद मिलेगी कि चंद्रमा कैसे बना और वहां क्या-क्या संसाधन मौजूद हैं. हालांकि, लैंडिंग की आखिरी जगह मिशन शुरू होने पर ही तय होगी लेकिन अभी तक की जांच से यह पक्का लग रहा है कि चंद्रयान-4 इसी पहाड़ी इलाके में उतरेगा.

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