गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक के पारित होने की सराहना करते हुए इसे भारत और संविधान की जीत करार दिया है। यह विधेयक अब संसद से पारित हो चुका है, जब राज्यसभा से इसे मंजूरी मिल गई। इससे पहले, बृहस्पतिवार को इस विधेयक को लोकसभा में पारित किया गया था, जहां 288 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 232 सदस्यों ने इसका विरोध किया। इस विधेयक को लेकर देश भर में चर्चा हो रही है, और गोवा के मुख्यमंत्री ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जो न केवल भारत के लिए, बल्कि संविधान की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के पारित होने को भारत और संविधान की जीत बताया है। उन्होंने इसे वक्फ बोर्डों में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय नेताओं को इस विधेयक को पारित कराने में उनके नेतृत्व के लिए बधाई दी। विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा होगी।

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सोशल मीडिया पर किया पोस्ट:

प्रमोद सावंत ने इस अवसर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘‘भारत जीत गया है! भारत की संसद ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को पारित कर दिया है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘यह विधेयक वक्फ बोर्ड की कार्यशैली को पारदर्शी, जिम्मेदार और समावेशी बनाएगा, जिससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन होगा।’’ उनके मुताबिक, इस विधेयक के लागू होने से वक्फ बोर्डों में सुधार होगा, और उन्हें अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा।

विधेयक का उद्देश्य और महत्व:
 
वक्फ (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में सुधार लाना है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, इसमें समावेशी प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया है, ताकि विभिन्न समुदायों और वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। प्रमोद सावंत ने कहा कि यह कदम वक्फ बोर्डों को कुशलतापूर्वक कार्य करने के लिए सक्षम बनाएगा, जिससे इन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग किया जा सकेगा। 

प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं की सराहना:

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और राजग सहयोगियों को इस विधेयक को लोकसभा में पारित कराने में उनके नेतृत्व के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उनके नेतृत्व में ही संभव हो सका, और यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। 

विरोध और समर्थन:

विधेयक के पारित होने के बाद, संसद में इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां सरकार ने इसे पारित कराने के लिए व्यापक समर्थन जुटाया, वहीं विपक्ष ने इसका विरोध भी किया। लोकसभा में 288 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 232 ने इसके विरोध में मतदान किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार होगा और यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के हित में काम करेगा। 

विधेयक के भविष्य पर उम्मीदें:

वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना भारत के संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति एक और कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से वक्फ बोर्डों का प्रबंधन अधिक पारदर्शी होगा, जिससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को रोकना भी है, ताकि इन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग हो सके और समाज के कमजोर वर्गों का भला हो सके।

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