जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने दो राज्यों की मतदाता सूची में उनका नाम होने पर चुनाव आयोग की ओर से जारी नोटिस पर मंगलवार को कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने वाले चुनाव आयोग की भी जिम्मेदारी बनती है कि इसकी जांच कर सुधार करे और यदि उसे लगता है कि उन्होंने गलती की है तो वह उन्हें गिरफ्तार करें।
प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘एसआईआर’ के बाद चुनाव आयोग ने सबकुछ ठीक होने का दावा किया था फिर अनियमितता क्यों मिल रही है। उन्होने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओ के नाम काटने की कोशिश की गयी, डराया गया और यदि उनका नाम दो जगहों पर दर्ज था तो उसे काट कर हटाया क्यों नहीं गया। उन्होंने कहा कि बीच के समय मे वह दो साल तक बंगाल में थे, तब उनका नाम वहां की मतदाता सूची में था, लेकिंन 2019 से उनका नाम बिहार में करगहर विधानसभा के मतदाता के रूप में है।
चुनाव आयोग नोटिस भेजकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा
जनसुराज के सूत्रधार ने कहा कि चुनाव आयोग नोटिस भेज कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस तरह की भभकियों से वह डरते नही हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग को लगता है कि इसमें कोई अपराध किया गया है, तो उसके पास गिरफ्तार करने का विकल्प खुला हुआ है।
