नई दिल्ली, 23 जनवरी । गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान शुक्रवार को कर्तव्य पथ पर राजस्थान की विश्वविख्यात उस्ता कला पर आधारित भव्य झांकी देखने काे मिली।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड में बीकानेर की विश्वविख्यात पारंपरिक उस्ता कला को केंद्र में रखा गया है, जो अपनी विशिष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक वैभव और जीवंत प्रस्तुति के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हाेगी। राजस्थान की यह झांकी गणतंत्र दिवस परेड में राज्य की समृद्ध लोक कला, शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
झांकी के डिजाइनर एवं पर्यवेक्षक हरशिव शर्मा ने बताया कि “राजस्थान मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर आधारित इस झांकी के अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा स्थापित की गई है, जो दर्शकों को लोक संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराती है। प्रतिमा के दोनों ओर उस्ता कला से सुसज्जित सुराही, कुप्पी और दीपक को आकर्षक फ्रेमों में प्रदर्शित किया गया है। झांकी का अगला भाग लगभग 13 फीट ऊंचा है, जो इसकी भव्यता और कलात्मक सौंदर्य को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
झांकी के ट्रेलर भाग में उस्ता कला से अलंकृत घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी तथा हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं, जो इस कला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं। पृष्ठभाग में विशाल ऊंट और उस पर सवार ऊंट की प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति एवं लोक जीवन का सशक्त प्रतीक बनी हुई है। दोनों ओर उस्ता कला से सजे मेहराबों में पत्तेदार स्वर्ण कारीगरी के उत्कृष्ट उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
हरशिव शर्मा ने बताया कि झांकी के दोनों ओर गेर लोक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकारों ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। इस प्रकार यह झांकी पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और शाही विरासत का सजीव संगम बनकर सामने आई।
राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि इस झांकी का निर्माण राज्य की उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता तथा उप सचिव अनुराधा गोगिया के मार्गदर्शन में किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह झांकी 26 जनवरी के मुख्य समारोह में अतिथियों और दर्शकों के मुख्य आकर्षण का केन्द्र बनेगी। विशेषकर बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध उस्ता कला, उसके उत्पाद और चटक रंगों की वेशभूषा में लोक कलाकार कर्तव्य पथ पर समा बांधेगे।
